टीबी मुक्त अभियान डीएम ने 2 मरीजों को लिया गोद, जिले में 5687 रोगियों को मिल रहा 2185 निक्षय मित्रों का सहारा
टीबी मुक्त भारत ऐप का नवाचार एआई चौटबॉट खुशी दे रही बीमारी, लक्षण और इलाज की हर सटीक जानकारी
-डीएम ने सक्षम लोगों और संस्थाओं से की मरीजों को गोद लेने की अपील, लगातार दो हफ्ते खांसी आने पर जांच है जरूरी
- रिपोर्ट: शाहबाज़ खां
रामपुर: प्रधानमंत्री के टीबी मुक्त भारत अभियान को जनभागीदारी का नया आयाम देने के लिए चलाई जा रही निक्षय मित्र योजना जिले में तेजी से जोर पकड़ रही है। इसी कड़ी में जिलाधिकारी अजय कुमार द्विवेदी ने खुद आगे आकर दो टीबी मरीजों को गोद लिया है। डीएम ने अपने कार्यालय में इन मरीजों को पोषण पोटली सौंपकर समाज के अन्य सक्षम लोगों और संस्थाओं के सामने एक बेहतरीन नजीर पेश की है। स्वास्थ्य विभाग के ताजा आंकड़ों के अनुसार, जिले में इस योजना के तहत अब तक 2185 निक्षय मित्रों ने 5687 टीबी मरीजों को गोद लेकर उन्हें पोषण पोटली उपलब्ध कराई है, जिससे मरीजों के जल्द स्वस्थ होने की दर में तेजी से सुधार हो रहा है।
जनभागीदारी से हारेगी टीबी की जंग
जिलाधिकारी ने मरीजों को पोषण पोटली सौंपते हुए स्पष्ट किया कि टीबी कोई लाइलाज बीमारी नहीं है, बल्कि यह पूरी तरह से उपचार योग्य है। समय पर जांच, नियमित दवा और संतुलित आहार से इस बीमारी को जड़ से खत्म किया जा सकता है। उन्होंने इस अभियान को एक जन-आंदोलन बनाने के उद्देश्य से जिले के सक्षम नागरिकों, स्वयंसेवी संस्थाओं, औद्योगिक प्रतिष्ठानों, अस्पतालों और पैथोलॉजी लैब से आगे आने का आह्वान किया। उनका कहना है कि सरकारी और गैर-सरकारी संगठन यदि निक्षय मित्र बनकर मरीजों को गोद लें, तो न केवल उन्हें पोषण मिलेगा बल्कि उनका मनोबल भी बढ़ेगा।

मरीजों की नई डिजिटल साथी बनी एआई चौटबॉट खुशी
टीबी मरीजों को बेहतर सहायता और जागरूकता उपलब्ध कराने के लिए तकनीक का भी भरपूर इस्तेमाल किया जा रहा है। इसके लिए टीबी मुक्त भारत एप विकसित किया गया है। इस एप की सबसे बड़ी खासियत इसमें मौजूद आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) आधारित चौटबॉट खुशी आपकी ई-संगिनी है। यह आधुनिक चौटबॉट मरीजों और आम लोगों को टीबी के लक्षण, उपचार की प्रक्रिया, जरूरी सावधानियों तथा आसपास उपलब्ध स्वास्थ्य सेवाओं की पूरी जानकारी बेहद आसान भाषा में तुरंत उपलब्ध करा रहा है।
नियमित पोषण से मरीजों को मिल रही संजीवनी
मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ.दीपा सिंह के मुताबिक, निक्षय मित्रों के सहयोग से टीबी मरीजों को जो नियमित पोषण सहायता मिल रही है, वह उनके लिए संजीवनी का काम कर रही है। इससे इलाज के दौरान मरीजों को शारीरिक मजबूती मिल रही है और उनके ठीक होने की गति तेज हुई है।
लक्षण दिखें तो तुरंत कराएं जांच
जिला क्षय रोग अधिकारी डॉ.सत्य प्रकाश ने आम जनमानस को जागरूक करते हुए बताया कि टीबी की समय पर पहचान ही इसके सफल इलाज की कुंजी है। यदि किसी भी व्यक्ति को लगातार दो सप्ताह से अधिक समय तक खांसी आ रही हो, तेजी से वजन कम हो रहा हो, भूख न लग रही हो, बलगम में खून आने की शिकायत हो, सीने में दर्द रहता हो या फिर अक्सर शाम के समय बुखार आता हो, तो इन लक्षणों को कतई नजरअंदाज न करें। ऐसे लक्षण दिखने पर बिना कोई देरी किए अपने निकटतम स्वास्थ्य केंद्र पर जाकर जांच अवश्य कराएं, क्योंकि समय पर इलाज शुरू होने से टीबी को पूरी तरह से हराया जा सकता है।
