“गुस्ताख़ी माफ़, हरियाणा” -पवन कुमार बंसल
“तेरी बाँकी अदाओं पर क़ुर्बान होने को जी चाहता है” याद आ गया, जब अमित शाह को लोकसभा में सुना।
वह कह रहे थे कि उनके (विपक्ष) के लिए चुनाव जीतना सर्वोपरि है, जबकि हमारे लिए देश और जनता पहले हैं। जनाब यह भी दावा कर रहे हैं कि उनकी सरकार जवाबदेही और पारदर्शिता के साथ चल रही है—वाह! दुमछला i
एक बार फिर दिल करता है कहने को—आपकी इन ‘बाँकी अदाओं’ पर क़ुर्बान जाऊँ, अमित शाह जी। एक ओर विरोधियों पर चुनाव आयोग, सीबीआई और ईडी जैसी एजेंसियाँ छोड़ दी जाती हैं, और दूसरी ओर जवाबदेही की बातें की जाती हैं—यह विरोधाभास समझ से परे है।
