राजधानी दिल्ली के मंगोलपुरी में बाढ़ जैसे बदतर हालात डूबी गाड़ियां और गटर प्रशासन का ढीला रवैया आया सामने
दिल्ली नगर निगम और जल बोर्ड की घोर संवेदनहीनता के चलते सड़कों पर आया गंदा पानी राहगीरों की जान खतरे में
- रिपोर्टर: प्रमोद यादव
नई दिल्ली। देश की राजधानी दिल्ली के मंगोलपुरी इलाके में मानसून की भारी बारिश के बाद जनजीवन पूरी तरह से अस्त-व्यस्त हो गया है और दिल्ली का प्रशासनिक अमला गहरी नींद में सोया हुआ है। स्थानीय स्तर से प्राप्त अठारह सेकंड के एक वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि पूरे इलाके में पानी का भराव इस कदर बढ़ चुका है कि सड़कों पर खड़ी गाड़ियों के पहिए पूरी तरह डूब चुके हैं। सबसे खतरनाक स्थिति यह है कि कटी हुई सड़कों के गटर और मैनहोल भी पानी में पूरी तरह समा चुके हैं, जिससे राहगीरों और स्थानीय नागरिकों के लिए स्थिति अत्यंत दयनीय और जानलेवा हो गई है।
निगम और जल बोर्ड की घोर लापरवाही:
मंगोलपुरी के स्थानीय निवासियों का कहना है कि जलभराव के कारण यह पता लगाना नामुमकिन हो गया है कि मुख्य सड़क कहाँ है और खुला गटर कहाँ है। दिल्ली नगर निगम (MCD) द्वारा समय पर नालों की गाद न निकालने और दिल्ली जल बोर्ड द्वारा सीवर लाइनों को दुरुस्त न रखने के कारण गटर का गंदा पानी सड़कों पर उफन रहा है। पानी से लबालब भरे इन छिपे हुए गटरों के कारण स्कूल जाने वाले छोटे बच्चों और राहगीरों के पैर फिसलने या गहरे गड्ढे में समा जाने का डर चौबीस घंटे बना हुआ है। इसके बावजूद दिल्ली का प्रशासनिक अमला पूरी तरह से ढीला पड़ा हुआ है और जमीनी स्तर पर राहत का कोई काम नहीं दिख रहा है।
हादसे से पहले जागे दिल्ली प्रशासन:’
Khabre Junction’ के माध्यम से स्थानीय पीड़ित जनता ने दिल्ली नगर निगम, दिल्ली जल बोर्ड और संबंधित जिला प्रशासन से तत्काल प्रभाव से मंगोलपुरी इलाके में पानी निकासी के हैवी पंप लगाने और इन जानलेवा गटरों को सुरक्षित रूप से ढकने की पुरजोर मांग की है। प्रशासनिक अधिकारियों को कड़ी चेतावनी दी गई है कि किसी भी गंभीर जानलेवा अनहोनी या हादसे का इंतजार किए बिना तत्काल इस सुस्त रवैये को बदला जाए, जनता परेशान है।
