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वाराणसी। रोहनिया थाना क्षेत्र में कथित तौर पर बड़े पैमाने पर जुआ संचालित किए जाने के आरोपों ने पुलिस महकमे की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। आरोप है कि रोहनिया थाने से चंद दूरी पर स्थित केशरीपुर गांव में करोड़ों रुपये के दांव वाला कथित जुए का खेल संचालित किया जा रहा है। यदि आरोपों में सच्चाई सामने आती है तो यह मामला केवल अवैध जुए तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि पुलिस की निगरानी व्यवस्था और स्थानीय सूचना तंत्र की कार्यक्षमता पर भी गंभीर सवाल खड़े करेगा।
थाना पास, फिर पुलिस की नजर दूर क्यों?
मामले का सबसे अहम पहलू यही है कि कथित जुआ स्थल रोहनिया थाने से अधिक दूर नहीं बताया जा रहा है। ऐसे में सवाल उठना स्वाभाविक है कि क्या पुलिस का स्थानीय सूचना तंत्र इतना कमजोर है कि कथित तौर पर बड़े पैमाने पर चल रही गतिविधि की जानकारी तक नहीं पहुंच सकी?
स्थानीय चर्चाओं और सामने आ रहे आरोपों के अनुसार, यहां सामान्य जुए के बजाय बड़े दांव लगाए जाने की बात कही जा रही है। लाखों से लेकर करोड़ों रुपये तक के कथित लेन-देन की चर्चाओं ने मामले की गंभीरता बढ़ा दी है। हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र और आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है।
‘करोड़ों के दांव’ की चर्चा, जांच की मांग तेज
यदि इतने बड़े स्तर पर जुआ संचालित किए जाने का आरोप सही है, तो कई सवालों का जवाब जरूरी है। कथित गतिविधि में कौन-कौन लोग शामिल हैं? इसका संचालन किस स्तर पर हो रहा है? इतनी बड़ी रकम के लेन-देन की निगरानी कौन कर रहा है? और सबसे अहम—क्या स्थानीय पुलिस को इसकी जानकारी थी?
यदि पुलिस को जानकारी थी, तो कार्रवाई क्यों नहीं हुई? और यदि जानकारी नहीं थी, तो फिर स्थानीय खुफिया तंत्र और निगरानी व्यवस्था पर सवाल उठना स्वाभाविक है।
क्या कार्रवाई से खुलेगा ‘करोड़ों के खेल’ का राज?
अब निगाहें पुलिस प्रशासन पर टिकी हैं। पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर कथित जुआ स्थल की वास्तविकता सामने लाने की जरूरत है। साथ ही यह भी जांच का विषय है कि कहीं किसी स्तर पर लापरवाही, अनदेखी या संरक्षण तो नहीं दिया गया।
हालांकि, केवल आरोपों के आधार पर किसी व्यक्ति को दोषी ठहराना उचित नहीं होगा। यदि आरोप गलत हैं तो संबंधित व्यक्ति को अपना पक्ष रखने का पूरा अधिकार है और पुलिस प्रशासन को भी स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए।
रोहनिया पुलिस के सामने सबसे बड़ा सवाल
केशरीपुर प्रकरण ने रोहनिया पुलिस की सक्रियता, निगरानी व्यवस्था और सूचना तंत्र पर सीधा सवाल खड़ा कर दिया है। कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए अवैध गतिविधियों की समय रहते जानकारी और उस पर प्रभावी कार्रवाई बेहद जरूरी है।
अब सवाल सीधा है—
“थाने से चंद कदम दूर कथित तौर पर ‘करोड़ों का खेल’ चलने की चर्चा है, तो पुलिस को इसकी जानकारी क्यों नहीं हुई? और अगर जानकारी थी, तो कार्रवाई क्यों नहीं हुई”?
इन सवालों का जवाब केवल बयान से नहीं, बल्कि निष्पक्ष जांच और ठोस कार्रवाई से ही सामने आएगा। केशरीपुर मामले में अब देखना होगा कि पुलिस प्रशासन आरोपों को गंभीरता से लेते हुए जांच करता है या फिर यह मामला भी सवालों और चर्चाओं के बीच दबकर रह जाता है।
