राज और खाज ख़ुद करने में मज़ा आता है करवाने में नहीं- मनोहर लाल को याद आ रहा ओम प्रकाश चौटाला का बयान
“गुस्ताखी माफ़ हरियाणा” — पवन क़ुमार बंसल
“राज और खाज — दोनों में मज़ा तभी है, जब आदमी खुद ही खुजा ले, दूसरे के भरोसे छोड़े तो न सुकून मिलता है, न संतोष।” हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री
ओम प्रकाश चौटाला अक्सर अपने ठेठ अंदाज़ में यह बात कह जाया करते थे। उस समय लोग इसे हंसी में उड़ाते थे, मगर हरियाणा की राजनीति में वक्त बड़ी जल्दी पुरानी बातों को नई मिसाल बना देता है।
आजकल यही लाइन शायद मनोहर लाल खट्टर के कानों में भी गूंजती होगी। सत्ता भले अब उनके चेले नायब सिंह सैनी के हाथ में हो, पर राजनीति में “रिमोट कंट्रोल” का सुख उतना ही अधूरा होता है जितना बिना घी का चूरमा।
कुर्सी की असली गर्मी सामने बैठकर महसूस होती है, पीछे परदे के उस पार से नहीं। सत्ता चाहे अपनी हो या शिष्य की, मन तो आखिर मन है — वो मुहर भी खुद लगाना चाहता है और माला भी खुद पहनना चाहता है।
हरियाणा की राजनीति में गुरु-शिष्य की जोड़ी नई नहीं, पर इतिहास गवाह है कि यहां “साया” अक्सर एक दिन खुद धूप बनने की कोशिश करता है। और राजनीति में धूप ज्यादा देर किसी एक छत पर टिकती भी नहीं।
