देश के प्रतिष्ठित सांस्कृतिक एवं शैक्षणिक संस्थानों में अग्रणी रामपुर रज़ा पुस्तकालय में आज विभिन्न सामाजिक, सांस्कृतिक एवं धार्मिक संगठनों के प्रतिनिधियों द्वारा पुस्तकालय के निदेशक डॉ. पुष्कर मिश्र को एक ज्ञापन सौंपा गया। ज्ञापन में पुस्तकालय के मुख्य प्रवेश द्वार पर स्थित अध्ययन कक्ष में विद्या की अधिष्ठात्री देवी माँ सरस्वती तथा दरबार हॉल में भारतीय कला एवं संस्कृति के प्रतीक भगवान नटराज की प्रतिमाएँ स्थापित किए जाने का प्रस्ताव रखा गया।
इस अवसर पर पुस्तकालय के निदेशक डॉ. पुष्कर मिश्र ने प्रतिनिधिमंडल का स्वागत करते हुए कहा कि आज रामपुर के गणमान्य नागरिकों एवं सुधीजनों ने रामपुर रज़ा पुस्तकालय में माँ सरस्वती जी तथा नटराज जी की प्रतिमाओं की स्थापना का जो आग्रह रखा है, उसके अनुरूप शुभ मुहूर्त निर्धारित कर उनकी स्थापना सुनिश्चित की जाएगी। रामपुर रज़ा पुस्तकालय की जो परिकल्पना यहाँ के नवाबों ने की थी, वह बहुसांस्कृतिक, बहुविषयक और बहुभाषिक दृष्टि पर आधारित थी। इस भवन की आठ मीनारें हैं। इसका एक भाग मस्जिद की स्थापत्य शैली का प्रतीक है, दूसरा गिरिजाघर का, तीसरा गुरुद्वारे का तथा चौथा मंदिर की संरचना का स्वरूप प्रस्तुत करता है। यह इस तथ्य का प्रमाण है कि रामपुर रज़ा पुस्तकालय सदैव सभी धर्मों, मतों और संस्कृतियों के सम्मान एवं समन्वय का केंद्र रहा है। उसी क्रम में कालांतर में जो भी विसंगतियाँ उत्पन्न हुईं, उन्हें दूर करने का सतत प्रयास किया जा रहा है। हमारा उद्देश्य है कि इन सभी विसंगतियों को समाप्त करते हुए पूरे रामपुर में सौहार्द, पारस्परिक प्रेम और सांस्कृतिक समन्वय की भावना को और अधिक सुदृढ़ किया जाए। चूँकि यह एक विद्या का पवित्र केंद्र है और माँ सरस्वती विद्या एवं ज्ञान की अधिष्ठात्री देवी मानी जाती हैं, इसलिए उनकी प्रतिमा की स्थापना रामपुर रज़ा पुस्तकालय की विश्वदृष्टि तथा ज्ञान परंपरा के पूर्णतः अनुरूप है। इसी प्रकार नटराज भारतीय कला और संस्कृति के सर्वोच्च प्रतीकों में से एक हैं। कला एवं संस्कृति के क्षेत्र में उनसे बड़ा प्रतीक विरले ही है। रामपुर रज़ा पुस्तकालय अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कला, संस्कृति और ज्ञान का एक अत्यंत महत्वपूर्ण केंद्र है। ऐसे में नटराज जी तथा माँ सरस्वती जी की प्रतिमाओं की स्थापना इस संस्थान के लिए गर्व और गौरव का विषय होगी। निश्चित ही, शुभ समय आने पर हम सभी ने जो यह संकल्प लिया है, वह पूर्ण होगा। यह एक महायज्ञ के समान है, जिसमें हम सभी को अपनी-अपनी आहुति देनी है। जितने अधिक लोग इसमें सहभागी बनेंगे, यह आयोजन उतना ही अधिक सुंदर, भव्य और ऐतिहासिक स्वरूप प्राप्त करेगा। विभिन्न सामाजिक, सांस्कृतिक एवं धार्मिक संगठनों के प्रतिनिधियों ने रामपुर रज़ा पुस्तकालय पर अपना विश्वास प्रकट किया। इसके लिए सभी का हार्दिक धन्यवाद।
विभिन्न सामाजिक, सांस्कृतिक एवं धार्मिक संगठनों के प्रतिनिधियों द्वारा दिए ज्ञापन में कहा गया कि रामपुर रज़ा पुस्तकालय केवल दुर्लभ पांडुलिपियों, ऐतिहासिक दस्तावेजों एवं ज्ञान-संपदा का भंडार मात्र नहीं है, बल्कि यह भारत की साझा संस्कृति, गंगा-जमुनी तहज़ीब तथा ज्ञान परंपरा का जीवंत प्रतीक भी है। ऐसे ऐतिहासिक एवं बौद्धिक महत्व के संस्थान में माँ सरस्वती की प्रतिमा की स्थापना ज्ञान, विद्या, विवेक एवं सांस्कृतिक समन्वय के प्रति समाज की श्रद्धा को और अधिक सुदृढ़ करेगी। साथ ही नटराज की प्रतिमा भारतीय कला, सृजन एवं सांस्कृतिक चेतना के प्रतीक के रूप में संस्थान की गरिमा में अभिवृद्धि करेगी।
ज्ञापन सौंपने वालों में भारतभूषण गुप्ता, महामंत्री, अखिल भारतीय वैश्य महासम्मेलन (उत्तर प्रदेश) एवं पूर्व भाजपा प्रत्याशी, 37 विधानसभा रामपुर; श्रीश गुप्ता, चेयरमैन, आई.आई.ए ., रामपुर ;डॉ. मुनीश चन्द्र शर्मा, राष्ट्रीय मंत्री, अखिल भारतवर्षीय ब्राह्मण महासभा; शैलेंद्र शर्मा, जिलाध्यक्ष, उत्तर प्रदेश उद्योग व्यापार मंडल, रामपुर; वीरेन्द्र गर्ग, महामंत्री, श्री सनातन रामलीला कमेटी, रामपुर; सुनील कुमार गोयल, श्री सनातन धर्म गौशाला (गौ सदन), रामपुर; सुनील कुमार अग्रवाल, श्री हरिहर मंदिर ट्रस्ट, रामपुर, सीए आर. के. अग्रवाल, अध्यक्ष, महामाया ट्रस्ट, रामपुर के साथ साथ अन्य शहर के गणमान्य जन प्रमुख रूप से उपस्थित रहे।
