आवारा कुत्तों की अनियंत्रित आबादी..!! कुत्तों के काटने से फैलने वाली रेबीज की घटनाएं दिनोंदिन बढ़ती..!!

देश में आवारा कुत्तों की तेजी से बढ़ती संख्या अब एक गंभीर सामाजिक और स्वास्थ्य संकट का रूप लेती जा रही है। खासकर शहरी क्षेत्रों में इनकी अनियंत्रित मौजूदगी से आमजन का जीवन प्रभावित हो रहा है। सड़कों, गलियों, और पार्कों में झुंड के रूप में घूमते ये कुत्ते न सिर्फ लोगों को डराते हैं, बल्कि उनके काटने से रेबीज जैसी जानलेवा बीमारी भी तेजी से फैल रही है।

हालात इतने बिगड़ चुके हैं कि अस्पतालों में रोजाना कुत्ते के काटने से पीड़ित मरीजों की संख्या बढ़ रही है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, भारत में रेबीज से हर साल लगभग 20,000 लोगों की मौत होती है, जो वैश्विक आंकड़े का एक बड़ा हिस्सा है।

इस खतरे को और अधिक गंभीर बना देती है – टीकाकरण और नसबंदी कार्यक्रमों की धीमी रफ्तार। कई शहरों में पर्याप्त संसाधन और जागरूकता के अभाव में कुत्तों का न तो समय पर टीकाकरण हो पा रहा है और न ही उनकी संख्या पर नियंत्रण।

हाल ही में, उच्चतम न्यायालय ने इस संवेदनशील मुद्दे पर स्वतः संज्ञान लेते हुए सरकारों को जिम्मेदार ठहराया है। कोर्ट ने निर्देश दिया है कि केंद्र और राज्य सरकारें मिलकर नसबंदी कार्यक्रमों को तेज करें और रेबीज रोकथाम के लिए व्यापक टीकाकरण अभियान चलाएं।

यह समय है कि हम भावनात्मक सोच से आगे बढ़कर व्यवस्थित योजना, बजट और तकनीकी सहयोग के साथ इस समस्या का स्थायी समाधान खोजें। प्रशासन, समाज और पशु-प्रेमी संगठनों को मिलकर एक संतुलित और मानवीय रणनीति अपनानी होगी, जिससे न केवल आम नागरिक सुरक्षित रहें, बल्कि पशुओं के अधिकारों की भी रक्षा हो सके।

यदि अब भी इसे नजरअंदाज किया गया, तो यह संकट जल्द ही महामारी का रूप ले सकता है – और इसकी कीमत मानव जीवन से चुकानी पड़ेगी।

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