सोनभद्र: चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों ने किया प्रदर्शन, निजीकरण रोकने और पुरानी पेंशन बहाली की उठाई मांग

  • रिपोर्ट: शिवेंदु श्रीवास्तव 

सोनभद्र। उत्तर प्रदेश चतुर्थ श्रेणी राज्य कर्मचारी महासंघ, जनपद शाखा सोनभद्र के जिलाध्यक्ष राजाराम दुबे के नेतृत्व में चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों ने पांच सूत्रीय मांग पत्र जिलाधिकारी सोनभद्र के माध्यम से मुख्यमंत्री को भेजा। कर्मचारियों ने सरकार से निजीकरण पर रोक, भर्ती खोलने और पुरानी पेंशन बहाली जैसी प्रमुख मांगें उठाईं।
जिलाध्यक्ष राजाराम दुबे ने कहा कि निजीकरण की नीतियों के कारण आंगनबाड़ी, आशा, शिक्षामित्र, रोजगार सेवक, पंचायत कर्मी, रसोइया, आंगनबाड़ी सहायिका सहित विभिन्न विभागों में कार्यरत कर्मचारियों को उचित वेतन नहीं मिल पा रहा है। इसके चलते उनके परिवारों का भरण-पोषण, बच्चों की शिक्षा और स्वास्थ्य व्यवस्था प्रभावित हो रही है।
राजेश रावत (प्रदेश उपाध्यक्ष) और मनोज पांडेय (जिला मंत्री) ने मांग की कि चतुर्थ श्रेणी के मृतक आश्रितों को उनकी योग्यता के अनुसार समूह ‘ग’ के पद पर नियुक्त किया जाए।

वहीं राकेश चौधरी (जिला उपाध्यक्ष) और बृजेश श्रीवास्तव (कोषाध्यक्ष) ने कहा कि सरकार जल्द से जल्द चतुर्थ श्रेणी की भर्ती खोले और निजीकरण पर रोक लगाए।
क्रांति सिंह सोमवंशी, प्रदेश अध्यक्ष (चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी संघ) ने कहा कि पुरानी पेंशन कर्मचारियों और शिक्षकों के बुढ़ापे की लाठी है। जिस तरह सांसदों और विधायकों को पुरानी पेंशन मिलती है, उसी प्रकार कर्मचारियों और अर्धसैनिक बलों को भी इसका लाभ दिया जाए। उन्होंने बताया कि 9 नवंबर 2025 को प्रदेश के कर्मचारी और शिक्षक डॉ. मंजीत सिंह पटेल (राष्ट्रीय अध्यक्ष, पुरानी पेंशन बहाली संघर्ष मोर्चा) के नेतृत्व में दिल्ली कूच करेंगे। ज्ञापन कार्यक्रम में पीआरडी, स्वास्थ्य, कृषि, सिंचाई, पशुपालन, आंगनवाड़ी, आशा, विकास भवन, कलेक्ट्रेट, मंडी विभाग सहित लगभग 17 विभागों के चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी और निजीकरण के तहत कार्यरत कर्मी शामिल रहे।
सभी ने अपने अधिकारों की लड़ाई के लिए संयुक्त संघर्ष समिति के गठन की घोषणा की।

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