-गुरु-शिष्य सम्मान समारोह में 1500 से अधिक मेधावी विद्यार्थियों का हुआ सम्मान, शिक्षा के साथ संस्कारों का दिया संदेश
ऐलनाबाद,02 जून( डॉ एम पी भार्गव विशेष संवाददाता, हरियाणा ): शिक्षा, संस्कार और सम्मान की भावना से ओत-प्रोत वातावरण के बीच आयोजित “गुरु-शिष्य सम्मान समारोह-2026” विद्यार्थियों, अभिभावकों एवं शिक्षकों के लिए प्रेरणादायी और यादगार बन गया। श्री खुशाल दास विश्वविद्यालय द्वारा छात्र कल्याण क्लब स्पंदन के अंतर्गत संचालित सद्भाव क्लब के संयोजन में सिरसा रोड स्थित सेतिया मैरिज पैलेस, ऐलनाबाद में आयोजित इस भव्य समारोह में बारहवीं कक्षा में 60 प्रतिशत से अधिक अंक प्राप्त करने वाले 1500 से अधिक मेधावी विद्यार्थियों को प्रशस्ति पत्र एवं स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया गया।
ज्ञात रहे कि श्री खुशाल दास विश्वविद्यालय एवं सैनिक स्कूल हनुमानगढ़ के संयुक्त तत्वावधान में पिछले कई वर्षों से प्रतिभा सम्मान समारोह का आयोजन किया जा रहा है। इस पहल का उद्देश्य प्रतिभाशाली विद्यार्थियों को प्रोत्साहित करना तथा शिक्षा के प्रति सकारात्मक वातावरण का निर्माण करना है।
समारोह में विद्यार्थियों के साथ उनके गुरुजन एवं अभिभावकों की गरिमामयी उपस्थिति ने आयोजन को भावनात्मक और प्रेरणादायी स्वरूप प्रदान किया। कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथियों द्वारा माँ सरस्वती के समक्ष दीप प्रज्वलित कर एवं सरस्वती वंदना के साथ किया गया। पूरे समारोह में शिक्षा के साथ-साथ संस्कार, अनुशासन, नैतिक मूल्यों तथा व्यक्तित्व निर्माण पर विशेष बल दिया गया।
कार्यक्रम की शुरुआत में श्री गुरु गोविंद सिंह चैरिटेबल ट्रस्ट के अध्यक्ष बाबूलाल जुनेजा ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि सफलता केवल अच्छे अंकों से नहीं, बल्कि अनुशासन, सकारात्मक सोच, उत्कृष्ट संस्कार और निरंतर परिश्रम से प्राप्त होती है। उन्होंने विद्यार्थियों को जीवन में बड़े लक्ष्य निर्धारित करने और कठिन परिस्थितियों में भी संघर्ष जारी रखने की प्रेरणा देते हुए कहा कि “आप सभी देश की अमूल्य धरोहर हैं। यदि संकल्प मजबूत हो तो कोई भी लक्ष्य असंभव नहीं होता।” उन्होंने विद्यार्थियों को स्वस्थ जीवनशैली अपनाने तथा जंक फूड से दूरी बनाकर संतुलित खानपान पर विशेष ध्यान देने की सलाह भी दी।

विश्वविद्यालय के प्रबंध निदेशक दिनेश कुमार जुनेजा ने विश्वविद्यालय की उपलब्धियों पर प्रकाश डालते हुए बताया कि वर्तमान में 12 हजार से अधिक विद्यार्थी विश्वविद्यालय से जुड़े हुए हैं, जिनमें विदेशी छात्र भी अध्ययनरत हैं। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय ने योग के क्षेत्र में विश्व रिकॉर्ड स्थापित कर अपनी विशिष्ट पहचान बनाई है तथा हाल ही में अंतरराष्ट्रीय स्तर का कृषि मेला भी सफलतापूर्वक आयोजित किया गया।
खेलों के क्षेत्र में भी विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों ने 100 से अधिक राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय पदक अर्जित कर संस्थान का नाम गौरवान्वित किया है। उन्होंने कहा कि शिक्षा केवल डिग्री प्राप्त करने का माध्यम नहीं, बल्कि व्यक्तित्व निर्माण, नेतृत्व क्षमता और सामाजिक उत्तरदायित्व विकसित करने का सशक्त आधार है।

समारोह के मुख्य वक्ता एवं सेवानिवृत्त आईजी गिरीश चावला ने कहा कि देश की भावी पीढ़ी को सम्मानित करना अत्यंत सराहनीय पहल है। उन्होंने विद्यार्थियों को अनुशासन, आत्मविश्वास और निरंतर सीखने की आदत बनाए रखने का संदेश देते हुए कहा कि माता-पिता के संघर्ष, त्याग और मार्गदर्शन का सम्मान करना प्रत्येक विद्यार्थी का कर्तव्य है। उन्होंने कहा कि “जो विद्यार्थी समय के साथ स्वयं को अपडेट रखते हैं, वही प्रतिस्पर्धा के इस युग में सफलता प्राप्त करते हैं।”
शिक्षाविदों और समाजसेवियों की रही गरिमामयी उपस्थिति
समारोह में समाजसेवी कृष्ण शेखावत (बबलू शेखावत), मास्टर बलदेव, सुभाष सोलंकी, वीरेंद्र भादू ,एडवोकेट राकेश बब्बर, बनवारी सहारण, रचना, डॉ. सतवीर सूर्यवंशी, राजेंद्र शर्मा, भूपेंद्र सिंह, शरणागत सिंह सहित अनेक शिक्षाविद, समाजसेवी एवं गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।
अतिथियों ने अपने संबोधन में कहा कि श्री खुशाल दास विश्वविद्यालय द्वारा प्रतिभाओं को सम्मानित करने की यह पहल न केवल विद्यार्थियों का मनोबल बढ़ाने वाली है, बल्कि समाज में शिक्षा के प्रति सकारात्मक वातावरण भी निर्मित करती है। उन्होंने कहा कि हनुमानगढ़ जिले को श्री खुशाल दास विश्वविद्यालय जैसा गुणवत्तापूर्ण शिक्षण संस्थान मिलना गौरव की बात है। विश्वविद्यालय शिक्षा, शोध, खेल, योग तथा सामाजिक सरोकारों के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य करते हुए क्षेत्र के युवाओं को नई दिशा प्रदान कर रहा है। इस प्रकार के सम्मान समारोह विद्यार्थियों को उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए प्रेरित करते हैं तथा उन्हें अपने सपनों को साकार करने का आत्मविश्वास प्रदान करते हैं।
विश्वविद्यालय परिवार के सहयोग से सफल हुआ आयोजन
समारोह के सफल आयोजन में विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार डॉ. मयंक माथुर, डॉ. सुनील बिरट, डॉ. बाबूलाल पारीक, सहायक कुलसचिव योगेंद्र स्वामी, अरविंद धामू , राजन अरोड़ा, प्रदीप चौहान, पूजा सुथार सहित विश्वविद्यालय परिवार के सभी सदस्यों का महत्वपूर्ण योगदान रहा।
कार्यक्रम का प्रभावी मंच संचालन अनिल जिज्ञासु एवं मदन लाल शर्मा द्वारा किया गया। कार्यक्रम के अंत में सभी अतिथियों, शिक्षकों एवं अभिभावकों ने विश्वविद्यालय की इस सराहनीय पहल की भूरि-भूरि प्रशंसा करते हुए इसे शिक्षा और संस्कारों के समन्वय का उत्कृष्ट उदाहरण बताया।
