इंदौर में दूषित पानी पीने से 7 लोगों की मौत, सरकार ने 3 अधिकारियों को किया बर्खास्त

इंदौर।मध्य प्रदेश के इंदौर शहर में दूषित पानी पीने से 7 लोगों की मौत का मामला सामने आया है, जिसने प्रशासन और स्वच्छता व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। रिपोर्ट के अनुसार, सीवेज का पानी पीने की पाइपलाइन में मिल जाने से नलों से जहरीला पानी सप्लाई हुआ, जिससे यह भयावह हादसा हुआ। घटना के बाद राज्य सरकार ने सख्त कार्रवाई करते हुए तीन अधिकारियों के खिलाफ कदम उठाया है।

देश के सबसे स्वच्छ शहरों में शुमार इंदौर के भागीरथपुरा इलाके से आई इस खबर ने पूरे देश को झकझोर दिया है। यहां पीने के पानी ने ‘जहर’ का रूप ले लिया, जिससे कई परिवारों में मातम पसर गया। जैसे ही मामला सामने आया, मध्य प्रदेश सरकार ने त्वरित कार्रवाई करते हुए दो अधिकारियों को बर्खास्त कर दिया, जबकि एक सब-इंजीनियर की सेवाएं समाप्त कर दी गईं।

‘जहरीले’ पानी से फैली बीमारी
भागीरथपुरा क्षेत्र में बीते कुछ दिनों से हालात बेहद गंभीर बने हुए हैं। नलों से आ रहे दूषित पानी के कारण सैकड़ों लोग उल्टी-दस्त की चपेट में आ गए। स्थानीय क्लीनिकों और अस्पतालों में मरीजों की लंबी कतारें देखने को मिलीं। स्वास्थ्य विभाग की टीमें घर-घर जाकर सर्वे कर रही हैं ताकि प्रभावित लोगों की पहचान कर समय पर इलाज सुनिश्चित किया जा सके।

अब तक 7 लोगों की मौत
इंदौर के मेयर पुष्यमित्र भार्गव के अनुसार, इस जल संकट में अब तक 7 लोगों की जान जा चुकी है। 24 दिसंबर के बाद से उल्टी और दस्त के मरीजों की संख्या अचानक बढ़ने लगी थी। फिलहाल 40 से अधिक लोग गंभीर हालत में अस्पताल में भर्ती हैं, जबकि 1000 से ज्यादा लोग अपनी जांच करा चुके हैं। मृतकों में बच्चे और बुजुर्ग भी शामिल हैं, जो संक्रमण और पानी की कमी को सहन नहीं कर पाए।

शिकायतों की अनदेखी का आरोप
स्थानीय लोगों का आरोप है कि वे पिछले छह महीनों से गंदे और बदबूदार पानी की शिकायत कर रहे थे, लेकिन नगर निगम प्रशासन ने इसे गंभीरता से नहीं लिया। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, नई पाइपलाइन बिछाने के लिए 2.5 करोड़ रुपये का टेंडर चार महीने पहले ही पास हो चुका था, लेकिन उस पर अब तक काम शुरू नहीं किया गया।

सरकार का सख्त रुख
घटना की गंभीरता को देखते हुए मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कड़ा रुख अपनाया है। नगर निगम के एक जोनल अधिकारी और एक सहायक इंजीनियर को निलंबित कर दिया गया है, जबकि एक सब-इंजीनियर को सेवा से टर्मिनेट किया गया है। इसके साथ ही मुख्यमंत्री ने मृतकों के परिजनों को 2-2 लाख रुपये की आर्थिक सहायता देने की घोषणा की है और पूरे मामले की जांच के लिए तीन सदस्यीय कमेटी गठित की है।

प्रशासन का कहना है कि दोषियों के खिलाफ आगे भी सख्त कार्रवाई की जाएगी और भविष्य में इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो, इसके लिए जल आपूर्ति व्यवस्था की व्यापक समीक्षा की जाएगी।

 

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