Raebareli Cyber Fraud: उत्तर प्रदेश के रायबरेली जिले में साइबर ठगी का एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसमें आरोपियों ने शादी के लिए बने ऑनलाइन प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल लोगों को जाल में फंसाने के लिए किया। पुलिस के मुताबिक, आरोपी मैट्रिमोनियल साइट्स पर विदेशी या NRI व्यक्ति के नाम से फर्जी प्रोफाइल तैयार करते थे। इसके बाद महिलाओं से बातचीत कर उनका भरोसा जीतते और शादी का प्रस्ताव देते थे। जब सामने वाला व्यक्ति उनके झांसे में आ जाता, तो ठगी का अगला चरण शुरू किया जाता था।
इस मामले में हरचंदपुर, चंदापुर और साइबर थाना पुलिस की संयुक्त कार्रवाई में चार आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है। पुलिस के मुताबिक गिरफ्तार आरोपियों की पहचान अरविंद कुमार, प्रसून जयंत, शिवा मिश्रा और मिथिलेश के रूप में हुई है। इनके पास से मोबाइल फोन, बैंक पासबुक, एटीएम कार्ड और नकदी बरामद होने की जानकारी सामने आई है। पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई शुरू कर उन्हें न्यायिक अभिरक्षा में भेज दिया है।
मैट्रिमोनियल साइट पर विदेशी बनकर बनाते थे फर्जी प्रोफाइल
पुलिस पूछताछ में सामने आई जानकारी के मुताबिक, गिरोह के सदस्य मैट्रिमोनियल साइट्स पर विदेशी व्यक्ति के नाम से फर्जी प्रोफाइल बनाते थे। इन प्रोफाइल में ऐसी जानकारी और तस्वीरों का इस्तेमाल किया जाता था, जिससे सामने वाले व्यक्ति को यह विश्वास हो कि वह किसी विदेशी या NRI व्यक्ति से बातचीत कर रहा है।
इसके बाद आरोपी मैसेज और बातचीत के जरिए धीरे-धीरे भरोसा कायम करने की कोशिश करते थे। बातचीत का उद्देश्य केवल संपर्क बनाए रखना नहीं था, बल्कि कथित तौर पर पीड़ित को भावनात्मक रूप से अपने प्रभाव में लेकर आर्थिक ठगी के अगले चरण तक पहुंचाना था।
ऐसे मामलों में फर्जी पहचान का इस्तेमाल साइबर अपराधियों के लिए एक महत्वपूर्ण हथियार बन जाता है। किसी व्यक्ति की वास्तविक पहचान सामने नहीं आने के कारण पीड़ित को शुरुआत में यह पता लगाना मुश्किल हो सकता है कि बातचीत करने वाला व्यक्ति वास्तव में वही है, जैसा वह ऑनलाइन खुद को बता रहा है।
शादी का वादा कर बढ़ाते थे भरोसा
पुलिस के अनुसार, आरोपी महिलाओं से शादी करने का वादा करते थे। बातचीत आगे बढ़ने के बाद वे यह भरोसा पैदा करते कि विदेश से उनके लिए महंगा गिफ्ट भेजा जा रहा है।
यहीं से कथित ठगी का दूसरा चरण शुरू होता था। पीड़ित को बताया जाता कि उसके लिए विदेश से महंगा सामान या गिफ्ट भेजा गया है और उसे प्राप्त करने के लिए कुछ औपचारिकताएं पूरी करनी होंगी।
इसके बाद गिरोह का दूसरा सदस्य कथित तौर पर कस्टम अधिकारी बनकर फोन करता था। वह पीड़ित को बताता था कि उसके नाम पर आया महंगा गिफ्ट कस्टम में फंसा हुआ है और उसे छुड़ाने के लिए टैक्स या अन्य शुल्क जमा करना होगा।
‘कस्टम अधिकारी’ बनकर मांगे जाते थे पैसे
पुलिस के मुताबिक, फर्जी कस्टम अधिकारी बनकर फोन करने वाला व्यक्ति पीड़ित पर यह विश्वास बनाने की कोशिश करता था कि वास्तव में विदेश से कोई गिफ्ट आया है। इसके बाद टैक्स के नाम पर पैसे ट्रांसफर करने को कहा जाता था।
आरोप है कि पीड़ितों से यह रकम गिरोह से जुड़े बैंक खातों में मंगाई जाती थी। पैसा खाते में पहुंचने के बाद उसे कथित तौर पर चेक या एटीएम के जरिए निकाल लिया जाता था। पुलिस के मुताबिक, इसके बाद रकम को गिरोह के सदस्यों के बीच बांट दिया जाता था।
इस तरह पूरे कथित फ्रॉड में एक ही कहानी के अलग-अलग किरदार बनाए जाते थे। पहले फर्जी विदेशी दूल्हा, फिर महंगे गिफ्ट की कहानी और आखिर में कस्टम अधिकारी बनकर भुगतान की मांग। पुलिस के अनुसार, इसी तरीके से गिरोह कई लोगों को अपना शिकार बना चुका था।
बैंक खाते में संदिग्ध लेनदेन से खुला मामला
यह पूरा मामला उस समय पुलिस की नजर में आया जब हरचंदपुर क्षेत्र स्थित जोहवाशर्की की ग्रामीण बैंक शाखा में संदिग्ध लेनदेन से जुड़ी शिकायत सामने आई। रिपोर्ट के मुताबिक, 21 सितंबर को बैंक शाखा में इस तरह की शिकायत के बाद पुलिस को मामले की जानकारी मिली।
इसके बाद पुलिस ने जांच शुरू की। जांच के दौरान कथित साइबर ठगी से जुड़े लोगों की जानकारी जुटाई गई और कार्रवाई की गई। हरचंदपुर क्षेत्र की पुलिस टीम, चंदापुर थाना पुलिस और साइबर टीम की संयुक्त कार्रवाई में आरोपियों को दतौली लिंक रोड के पास से गिरफ्तार किया गया।
चार आरोपी गिरफ्तार, सामान भी बरामद
पुलिस कार्रवाई के दौरान चार लोगों को गिरफ्तार किया गया। गिरफ्तार आरोपियों में हरचंदपुर क्षेत्र के जोहवाशर्की निवासी अरविंद कुमार, प्रसून जयंत, शिवा मिश्रा और मिथिलेश शामिल हैं।
पुलिस के मुताबिक, आरोपियों के कब्जे से चार स्मार्ट मोबाइल फोन, तीन बैंक पासबुक, दो एटीएम कार्ड और 1.75 लाख रुपये नकद बरामद किए गए हैं। इन सामानों की जांच के जरिए पुलिस कथित साइबर ठगी के नेटवर्क और उससे जुड़े अन्य लोगों के बारे में जानकारी जुटा रही है।
पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ कूटरचित दस्तावेजों और साइबर फ्रॉड से संबंधित कानूनी कार्रवाई की है। गिरफ्तार आरोपियों को न्यायिक अभिरक्षा में भेजे जाने की जानकारी सामने आई है।
पुलिस अब पूरे नेटवर्क की जांच में जुटी
चार आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद जांच का दायरा और बढ़ सकता है। पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि कथित गिरोह ने कितने लोगों को अपना शिकार बनाया और इससे जुड़े अन्य लोग कौन-कौन हैं।
ऐसे मामलों में केवल एक या दो लोगों की गिरफ्तारी से पूरी तस्वीर सामने नहीं आती। फर्जी प्रोफाइल बनाने, पीड़ितों से बातचीत करने, बैंक खातों का इस्तेमाल करने और रकम निकालने जैसे अलग-अलग कामों में अलग-अलग लोग शामिल हो सकते हैं। इसलिए जांच एजेंसियां बैंक लेनदेन और डिजिटल उपकरणों से मिलने वाली जानकारी के आधार पर नेटवर्क की पड़ताल करती हैं।
मैट्रिमोनियल फ्रॉड को लेकर पहले भी चेतावनी
मैट्रिमोनियल प्लेटफॉर्म के जरिए साइबर ठगी कोई बिल्कुल नया तरीका नहीं है। केंद्र सरकार की इंडियन साइबर क्राइम कोऑर्डिनेशन सेंटर यानी I4C की एडवाइजरी में भी मैट्रिमोनियल प्लेटफॉर्म के गलत इस्तेमाल को लेकर चेतावनी दी गई है। एडवाइजरी में बताया गया है कि साइबर अपराधी फर्जी पहचान और बदली हुई तस्वीरों के जरिए लोगों से संपर्क कर सकते हैं और भावनात्मक भरोसा कायम करने के बाद आर्थिक ठगी की कोशिश कर सकते हैं।
उत्तर प्रदेश पुलिस भी मैट्रिमोनियल स्कैम को लेकर लोगों को सावधान रहने की सलाह देती है। पुलिस की साइबर क्राइम जानकारी के मुताबिक, अगर शादी या रिश्ते के नाम पर कोई व्यक्ति पैसे ट्रांसफर करने के लिए कहता है तो उसकी पहचान और दावे की अच्छी तरह जांच करनी चाहिए और बिना सत्यापन पैसे नहीं भेजने चाहिए।
शादी के नाम पर ऑनलाइन रिश्तों में क्यों जरूरी है सावधानी?
ऑनलाइन मैट्रिमोनियल प्लेटफॉर्म ने लोगों के लिए रिश्ते तलाशना आसान बनाया है, लेकिन इसके साथ साइबर सुरक्षा की जरूरत भी बढ़ी है। किसी प्रोफाइल में विदेशी नौकरी, बड़ी कंपनी में पद, अच्छी आय या विदेश में रहने जैसी जानकारी लिखी होने का मतलब यह नहीं है कि वह जानकारी सही ही होगी।
खासकर तब सावधानी जरूरी है जब ऑनलाइन बातचीत करने वाला व्यक्ति अचानक पैसों से जुड़ी कोई मांग करने लगे। महंगा गिफ्ट, कस्टम टैक्स, डिलीवरी चार्ज, इमरजेंसी या किसी अन्य शुल्क के नाम पर भुगतान मांगना गंभीर चेतावनी का संकेत हो सकता है।
रिश्ता शादी तक पहुंचने से पहले यदि सामने वाला व्यक्ति पैसे भेजने के लिए दबाव बनाए या ऐसी कहानी बताए जिसे स्वतंत्र रूप से सत्यापित करना संभव न हो, तो किसी भरोसेमंद परिवार के सदस्य को इसकी जानकारी देना जरूरी है।
रायबरेली का मामला क्या संदेश देता है?
रायबरेली में सामने आया मामला बताता है कि साइबर अपराधी अब केवल पारंपरिक बैंक या ऑनलाइन भुगतान ठगी तक सीमित नहीं हैं। वे लोगों की भावनाओं और भरोसे का इस्तेमाल करके भी आर्थिक अपराध करने की कोशिश कर रहे हैं।
इस मामले में पुलिस के अनुसार कथित गिरोह ने पहले शादी के नाम पर भरोसा बनाया, फिर विदेश से गिफ्ट भेजने की कहानी तैयार की और अंत में कस्टम अधिकारी बनकर पैसे की मांग की। यानी ठगी को अंजाम देने के लिए एक पूरी कहानी और कई किरदारों का इस्तेमाल किया गया।
पुलिस की कार्रवाई में चार आरोपियों की गिरफ्तारी और मोबाइल फोन, बैंक दस्तावेज, एटीएम कार्ड तथा नकदी की बरामदगी हुई है। अब जांच के दौरान यह सामने आना बाकी है कि इस नेटवर्क से कितने लोग जुड़े थे और कथित तौर पर कितनी ठगी की गई। फिलहाल पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है और गिरफ्तार आरोपियों से मिली जानकारी के आधार पर आगे की कार्रवाई की जा रही है।
