बेंगलुरु: कर्नाटक की राजनीति में बड़ा उलटफेर देखने को मिला है। वरिष्ठ कांग्रेस नेता सिद्धारमैया ने गुरुवार को मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया। उन्होंने बेंगलुरु के लोक भवन पहुंचकर अपना इस्तीफा राज्यपाल के सचिव को सौंपा। बताया गया है कि राज्यपाल फिलहाल शहर से बाहर हैं, इसलिए इस्तीफा उनके सचिव को जमा कराया गया।
इस्तीफे के बाद मीडिया से बातचीत में सिद्धारमैया ने कहा कि उन्होंने पार्टी हाईकमान के निर्देश के बाद यह फैसला लिया है। उन्होंने भरोसा जताया कि राज्यपाल संवैधानिक प्रक्रिया के तहत उनके इस्तीफे को स्वीकार करेंगे। उन्होंने कांग्रेस नेतृत्व का आभार जताते हुए सोनिया गांधी, राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खड़गे को धन्यवाद दिया।
राजनीति में आना ‘संयोग’, कभी CM बनने का नहीं था सपना
अपने संबोधन के दौरान सिद्धारमैया भावुक भी नजर आए। उन्होंने कहा कि उनका राजनीतिक सफर किसी योजनाबद्ध तरीके से नहीं शुरू हुआ था। उनका कहना था कि वह एक साधारण गांव से आते हैं और उनके परिवार का कोई भी सदस्य राजनीति से जुड़ा नहीं रहा।
सिद्धारमैया ने कहा कि उन्होंने कभी यह नहीं सोचा था कि वह विधायक, मंत्री या मुख्यमंत्री बनेंगे। उनके मुताबिक, राजनीति में उनकी एंट्री संयोगवश हुई, लेकिन उन्होंने हमेशा संविधान और सामाजिक न्याय की विचारधारा को अपनी राजनीति का आधार बनाया।
बुद्ध, गांधी और अंबेडकर की विचारधारा का किया जिक्र
सिद्धारमैया ने कहा कि उनकी सोच और राजनीति पर बुद्ध, बसवेश्वर, महात्मा गांधी और डॉ. भीमराव अंबेडकर की शिक्षाओं का गहरा प्रभाव रहा है। उन्होंने सामाजिक समानता, सभी समुदायों के साथ रहने और समान अधिकारों की जरूरत पर जोर दिया।
उन्होंने कहा कि समाज में हर व्यक्ति को समान अवसर मिलने चाहिए और संविधान में उनका पूरा विश्वास है। साथ ही उन्होंने आर्थिक संसाधनों के समान वितरण की भी वकालत की।
राज्यसभा सीट की चर्चा और हाईकमान की भूमिका
सूत्रों के अनुसार, कांग्रेस हाईकमान ने सिद्धारमैया को मुख्यमंत्री पद छोड़ने के लिए कहा था और उन्हें राज्यसभा भेजे जाने का प्रस्ताव भी दिया गया है। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि यह संदेश सीधे राहुल गांधी की ओर से आया था।
इससे पहले भी सिद्धारमैया संकेत दे चुके थे कि अगर पार्टी नेतृत्व उनसे इस्तीफा मांगता है, तो वह पीछे नहीं हटेंगे।
दिल्ली बैठक के बाद तेज हुई थीं अटकलें
मंगलवार को सिद्धारमैया और डीके शिवकुमार को कांग्रेस हाईकमान ने दिल्ली बुलाया था। वहां पार्टी मुख्यालय में राहुल गांधी, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, केसी वेणुगोपाल और अन्य वरिष्ठ नेताओं के साथ कई दौर की बैठकें हुई थीं।
इन बैठकों के बाद कर्नाटक में नेतृत्व परिवर्तन की अटकलों ने जोर पकड़ लिया था, जो अब सिद्धारमैया के इस्तीफे के साथ सच साबित होती दिखाई दे रही हैं।
अब आगे क्या होगा?
संवैधानिक प्रावधानों के मुताबिक, किसी मुख्यमंत्री का इस्तीफा तब प्रभावी होता है जब राज्यपाल उसे स्वीकार कर लेते हैं। हालांकि राज्यपाल राज्य से बाहर रहते हुए भी अपने संवैधानिक अधिकारों का इस्तेमाल कर सकते हैं।
ऐसे में अब सबकी नजर राज्यपाल के अगले कदम और कर्नाटक में नए मुख्यमंत्री के चयन पर टिकी हुई है।
