गाजियाबाद :- मुरादनगर की गंग नहर—जिसे लोग ‘छोटा हरिद्वार’ कहते हैं, आज वो मासूमों की जिंदगी निगलने वाला ‘डेथ ट्रैप’ बन चुकी है। महज दो महीनों में लगभग 20 लोगों की डूबने से मौत हो चुकी है। लेकिन क्या ये सिर्फ हादसे हैं, या इसके पीछे कोई गहरा और खौफनाक षड्यंत्र है?
हाल ही में एक बेहतरीन तैराक हरप्रीत सिंह ने डूबते हुए व्यक्ति को बचाते हुए अपनी जान गंवा दी। सवाल उठता है कि एक कुशल तैराक आखिर कैसे डूब गया? स्थानीय लोग और खुद जनप्रतिनिधि इस पर गंभीर आरोप लगा रहे हैं। आरोप है कि वहाँ सुरक्षा के नाम पर सिर्फ जंग लगी चेनें हैं। जब कोई डूबता है, तो एनडीआरएफ और प्रशासन सिर्फ 72 घंटे बाद लाश के तैरने का इंतजार करता है।
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इसी लाचारी का फायदा उठाता है स्थानीय गोताखोरों का एक कथित ‘खूनी नेक्सस’ आरोप हैं कि ये गोताखोर लाशें निकालने के नाम पर बेबस परिवारों से 20,000 से 30,000 रुपये तक वसूलते हैं। पानी के भीतर लूटपाट और साजिश की बू आ रही है। पूर्व में विधायक नंदकिशोर गुर्जर ने भी इस मुद्दे पर आवाज उठाई थी, जिससे कुछ समय के लिए ये खौफनाक सिलसिला थमा था।
जनता की मांग है कि नहर स्थित शनि मंदिर के पुजारियों और संदिग्ध गोताखोरों के गठजोड़ की कुंडली खंगाली जाए। इस खूनी खेल और ‘जल-जेहाद’ जैसे गंभीर आरोपों की तुरंत उच्च स्तरीय जांच होनी चाहिए। प्रशासन अब और कितनी मौतों का इंतजार करेगा?
