प्राण जाये पर वचन ना जाये, धर्म की खातिर बिक गये तीनों प्राणी, रामलीला में दिखाया गया राजा हरिशचंद्र का दान

बुलंदशहर से हेमंत कुमार की रिपोर्ट
सिकंदराबाद नगर के मोहल्ला रामबाड़ा स्थित रामलीला मैदान में रामलीला महोत्सव में राजा हरिशचंद्र नाटक की लीला का मंचन हुआ। राधिका कृष्ण कला मंडल एवं रामलीला मंडल के वृंदावन से आए व्यास पंकज भारद्वाज व कलाकारों ने लीला में राजा हरिश्चंद्र से संत विश्वामित्र ने दान में राजपाट ले लिया और ढाई ढाई भार सोना लेने के लिए तीनो प्राणियों को काशी नगरी में बिकवा दिया और अपना कर चुका लिया। जिसके बाद विश्वामित्र ने अनेकों प्रकार से राजा हरिश्चंद्र की कठिन परीक्षा ली। जिसमें राजा हरिशचंद्र सच्चे, ईमानदार व खरे उतरे ओर अपने धर्म को नहीं जाने दिया।

धर्म की ख़ातिर अपना सब कुछ दाव पर रख दिया यहाँ तक की अपनी प्राणप्रिय तारावती व पुत्र रोहिताश्व को ब्रह्ममण के घर व अपने आप को एक कालिया भंगी के यहाँ बिकवा दिया और उस साधू का वचन पूरा कर दिया। यहाँ तक की अपने धर्म की खातिर अपने बेटे की मृत्यु के पश्चात अपनी पत्नी से कर भी वसूलते है अंत में सत्य और ईमानदारी की जीत होती है। रामलीला के दौरान बताया कि हम सभी मनुष्यों को सच्चाई व ईमानदारी के रास्ते पर चलना चाहिए। हमेशा सत्य की जीत होती है। रामलीला में मंच का संचालन महासचिव अरविंद दीक्षित ने किया।

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