जल जीवन मिशन की बैठक में सैलजा ने उठाया हरियाणा का जल संकट, यमुना-घग्गर लिंक पर काम करने की मांग
14 जिलों में जल संकट पर जताई चिंता, कहा-नहरों के टेल तक पहुंचे पूरा पानी, ओटू झील को पश्चिमी हरियाणा का ‘जल बैंक’ बनाने की रखी मांग
Haryana, August 7 (डॉ एम पी भार्गव, विशेष संवाददाता हरियाणा): हरियाणा भवन में जल जीवन मिशन और प्रदेश की जल व्यवस्था को लेकर केंद्रीय जल शक्ति मंत्री के साथ हरियाणा के लोकसभा एवं राज्यसभा सांसदों की हुई महत्वपूर्ण बैठक में सिरसा की कांग्रेस सांसद, पूर्व केंद्रीय मंत्री, कांग्रेस की राष्ट्रीय महासचिव एवं कांग्रेस कार्यसमिति (सीडब्ल्यूसी) सदस्य कुमारी सैलजा ने प्रदेश के पेयजल और सिंचाई संकट से जुड़े कई महत्वपूर्ण मुद्दे प्रमुखता से उठाए। उन्होंने कहा कि हरियाणा के 14 जिलों में जल संकट गंभीर चिंता का विषय बनता जा रहा है। अनेक गांवों और शहरी क्षेत्रों में पर्याप्त एवं स्वच्छ पेयजल की समस्या है, वहीं किसानों को सिंचाई के लिए आवश्यकता के अनुरूप नहरी पानी नहीं मिल रहा। विशेष रूप से नहरों, माइनरों और रजबहों के अंतिम छोर यानी टेल तक निर्धारित मात्रा में पानी न पहुंचना बड़ी समस्या है।
कुमारी सैलजा ने कहा कि जल जीवन मिशन का वास्तविक उद्देश्य केवल पाइपलाइन बिछाना नहीं, बल्कि प्रत्येक घर तक नियमित रूप से पर्याप्त और स्वच्छ पेयजल पहुंचाना है। इसलिए जल संकट वाले जिलों में पेयजल स्रोतों, जलघरों, नहरी आपूर्ति, भूजल स्तर और पानी की गुणवत्ता की व्यापक समीक्षा की जाए। सांसद ने कहा कि हरियाणा में एक तरफ मानसून के दौरान बड़ी मात्रा में बरसाती पानी बहकर निकल जाता है और कई बार बाढ़ का कारण बनता है, जबकि दूसरी ओर सिरसा, फतेहाबाद सहित पश्चिमी और दक्षिणी हरियाणा के अनेक क्षेत्रों में पेयजल और सिंचाई के पानी की कमी बनी रहती है। इस विरोधाभास को दूर करने के लिए केंद्र और राज्य सरकार को मिलकर दीर्घकालीन एवं एकीकृत जल प्रबंधन नीति तैयार करनी चाहिए। सांसद ने केंद्रीय जल शक्ति मंत्री के समक्ष कहा कि भारत सरकार की नदी जोड़ो योजना के तहत यमुना-घग्गर लिंक की संभावनाओं पर गंभीरता से काम किया जाए। मानसून के दौरान यमुना में उपलब्ध अतिरिक्त बरसाती पानी को तकनीकी रूप से व्यवहार्य लिंक, चैनल अथवा अन्य व्यवस्था के माध्यम से घग्गर तक पहुंचाने के लिए केंद्र और हरियाणा सरकार संयुक्त तकनीकी सर्वे करवाकर डीपीआर तैयार करें। इससे एक ओर अतिरिक्त पानी से पैदा होने वाले बाढ़ के खतरे को कम करने में मदद मिल सकती है, वहीं दूसरी ओर यही पानी सिरसा, फतेहाबाद सहित पश्चिमी हरियाणा की सिंचाई, जल भंडारण और भूजल रिचार्ज में उपयोग किया जा सकता है।
सांसद कुमारी सैलजा ने सिरसा जिले की ओटू झील को पश्चिमी हरियाणा के बड़े ‘जल बैंक’ के रूप में विकसित करने की मांग करते हुए कहा कि झील में वर्षों से जमा गाद का वैज्ञानिक आकलन कर व्यापक डी-सिल्टिंग और खुदाई कर इसकी जल धारण क्षमता बढ़ाई जाए। वर्ष 1964-65 में झील के लिए अधिग्रहित भूमि का नए सिरे से राजस्व एवं तकनीकी सर्वे कर वर्तमान स्थिति सार्वजनिक की जाए। केंद्र और राज्य सरकार मिलकर अलग से ‘ओटू झील पुनर्जीवन एवं जल भंडारण परियोजना’ तैयार करें, ताकि मानसून के दौरान घग्गर में आने वाले अतिरिक्त पानी को यहां संग्रहित कर बाद के महीनों में कृषि एवं अन्य जरूरतों के लिए इस्तेमाल किया जा सके। सांसद ने घग्गर नदी की सफाई, डी-सिल्टिंग और तटबंधों की मजबूती का मुद्दा भी उठाते हुए कहा कि पंचकूला-अंबाला से फतेहाबाद और सिरसा तक इसके संवेदनशील क्षेत्रों का वैज्ञानिक सर्वे कराया जाए और आवश्यकता के अनुसार नदी की जल वहन क्षमता बढ़ाई जाए।
