शिक्षा मंत्री का इस्तीफा स्वागत योग्य पर बहुत पहले हो जाना चाहिए था: कुमारी सैलजा

ऐलनाबाद, हरियाणा 26 जुलाई ( डॉ एम पी भार्गव ) सिरसा की कांग्रेस सांसद कुमारी सैलजा ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री के इस्तीफे को देर से लिया गया, लेकिन आवश्यक कदम बताते हुए कहा कि यदि केंद्र सरकार यह निर्णय पहले ले लेती, तो देशभर में लाखों विद्यार्थियों को लंबे समय तक अनिश्चितता का सामना नहीं करना पड़ता, संसद का बहुमूल्य समय भी बार-बार बाधित नहीं होता और छात्रों के शांतिपूर्ण आंदोलन के दौरान उत्पन्न तनावपूर्ण परिस्थितियों से भी बचा जा सकता था।

कुमारी सैलजा ने कहा कि शिक्षा व्यवस्था केवल सरकार का विषय नहीं, बल्कि देश के भविष्य का प्रश्न है। प्रतियोगी परीक्षाओं और प्रवेश परीक्षाओं की पारदर्शिता पर उठे सवालों ने विद्यार्थियों और अभिभावकों का विश्वास प्रभावित किया है। ऐसे में केवल मंत्री का इस्तीफा पर्याप्त नहीं है, बल्कि पूरी परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता, जवाबदेही और विश्वसनीयता स्थापित करने के लिए ठोस एवं समयबद्ध सुधार किए जाने चाहिए। सांसद ने कहा कि कांग्रेस पार्टी पहले दिन से यह मांग करती रही है कि संसद सुचारु रूप से चले, छात्रों से जुड़े मुद्दों पर विस्तृत चर्चा हो, नैतिक जिम्मेदारी तय की जाए तथा युवाओं की आवाज़ को गंभीरता से सुना जाए। लोकतंत्र में संवाद ही समाधान का सबसे प्रभावी माध्यम है।

कुमारी सैलजा ने कहा कि आंदोलन के दौरान जिन विद्यार्थियों के साथ बल प्रयोग हुआ और जिन पर विभिन्न मामले दर्ज किए गए, उनकी निष्पक्ष समीक्षा की जानी चाहिए। यदि किसी निर्दोष छात्र के साथ अन्याय हुआ है तो उसे न्याय मिलना चाहिए तथा दोषी अधिकारियों की जवाबदेही भी तय की जानी चाहिए। सांसद ने कहा कि देश के युवाओं ने मेहनत और ईमानदारी के बल पर अपने भविष्य के सपने संजोए हैं। सरकार का दायित्व है कि वह ऐसा वातावरण बनाए, जिसमें प्रत्येक छात्र को निष्पक्ष परीक्षा, समान अवसर और न्याय का विश्वास मिले। सरकार को राजनीतिक टकराव से ऊपर उठकर छात्रों के हित में सभी आवश्यक सुधार लागू करने चाहिए।

सरकार अब अहंकार छोड़कर युवाओं की भावनाओं को समझेगी 

कुमारी सैलजा ने कहा कि कांग्रेस पार्टी विद्यार्थियों के अधिकारों, पारदर्शी शिक्षा व्यवस्था और जवाबदेही की लड़ाई लोकतांत्रिक एवं संवैधानिक तरीके से सड़क से लेकर संसद तक पूरी मजबूती के साथ उठाती रहेगी। कुमारी सैलजा ने आशा व्यक्त की कि सरकार अब अहंकार छोड़कर युवाओं की भावनाओं को समझेगी, संसद में सार्थक चर्चा सुनिश्चित करेगी और शिक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए ठोस कदम उठाएगी।

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