डेयरी, मत्स्य एवं पशु संसाधन विभाग को बनाया जायेगा और सशक्त : डेयरी, मत्स्य एवं पशु संसाधन मंत्री नन्दकिशोर राम

पटना। डेयरी, मत्स्य एवं पशु संसाधन मंत्री नन्दकिशोर राम ने सोमवार को अपने कार्यालय कक्ष में विभागीय कार्यों की विस्तृत समीक्षा की। इस दौरान पशुपालन निदेशालय से जुड़े विभिन्न महत्वपूर्ण बिंदुओं पर चर्चा करते हुए आवश्यक दिशा-निर्देश दिए गए। बैठक में पशुपालन निदेशक उज्ज्वल कुमार सिंह भी उपस्थित रहे।
बैठक के दौरान मंत्री ने राज्य की सभी गोशालाओं की स्थिति को बेहतर बनाने पर विशेष जोर दिया। उन्होंने गोशालाओं की चल एवं अचल संपत्तियों का समुचित लेखा-जोखा रखने तथा पारदर्शी व्यवस्था सुनिश्चित करने का निर्देश दिया। साथ ही प्रथम वर्गीय पशु चिकित्सालयों एवं अनुमंडलीय पशु चिकित्सालयों में दवाओं की उपलब्धता, साफ-सफाई एवं बेहतर चिकित्सा व्यवस्था सुनिश्चित करने के लिए भी आवश्यक कदम उठाने को कहा।
मंत्री ने कहा कि बिहार में पशु चिकित्सा शिक्षा के विस्तार की आवश्यकता है। उन्होंने निदेशक को निर्देश दिया कि राज्य में पशु चिकित्सा की पढ़ाई के लिए नए संस्थान खोले जाने की संभावनाओं पर कार्य करते हुए आवश्यक कार्रवाई की जाए।
बैठक में ग्रामीण क्षेत्रों में बकरी पालन, मुर्गी पालन एवं सुकर पालन योजनाओं को अधिक व्यवहारिक और पशुपालकों के लिए सरल बनाने पर भी चर्चा हुई। मंत्री ने कहा कि इन योजनाओं का लाभ अधिक से अधिक ग्रामीण परिवारों तक पहुंचना चाहिए, जिससे रोजगार के अवसर बढ़े और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिले।
मंत्री ने आधारभूत संरचनाओं एवं सुविधाओं को और बेहतर बनाने के लिए संबंधित अधिकारियों को आवश्यक निर्देश दिए।
कुलपति ने मंत्री को किया आमंत्रित
इस बीच बिहार पशु विज्ञान विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. इन्द्रजीत सिंह ने डेयरी, मत्स्य एवं पशु संसाधन मंत्री नंदकिशोर राम से शिष्टाचार मुलाकात की। इस दौरान कुलपति ने मंत्री को आगामी 22 मई 2026 को आयोजित होने वाले विश्वविद्यालय के चतुर्थ दीक्षांत समारोह में विशिष्ट अतिथि के रूप में शामिल होने हेतु आमंत्रित किया।
मुलाकात के दौरान मंत्री नंदकिशोर राम ने कहा कि राज्य में डेयरी, मत्स्य एवं पशु चिकित्सा विशेषज्ञों की आवश्यकता लगातार बढ़ रही है। ऐसे में विश्वविद्यालय की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण हो जाती है। उन्होंने कहा कि पशुपालन एवं पशु स्वास्थ्य के क्षेत्र में बेहतर नीतियां तैयार करने के लिए विश्वविद्यालय को राज्य सरकार के “थिंक टैंक” के रूप में कार्य करना चाहिए।
मंत्री ने पशु जनित खाद्य पदार्थों में बढ़ती मिलावट पर भी चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि इस दिशा में शोध एवं वैज्ञानिक पहल की आवश्यकता है, ताकि आम लोगों को सुरक्षित एवं गुणवत्तापूर्ण खाद्य सामग्री उपलब्ध कराई जा सके।
कुलपति डॉ. इन्द्रजीत सिंह ने मंत्री को विश्वविद्यालय की शिक्षण, शोध एवं प्रसार गतिविधियों की विस्तृत जानकारी दी।

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