China ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) कंप्यूटिंग के क्षेत्र में बड़ी प्रगति का दावा किया है। उद्योग और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के अनुसार, देश ने 1,882 एक्साफ्लॉप्स (exaflops) की कंप्यूटिंग क्षमता हासिल कर ली है, यानी प्रति सेकंड अरबों-खरबों गणनाएं करने की ताकत।
South China Morning Post की रिपोर्ट के मुताबिक, विशेषज्ञों का मानना है कि यह आंकड़ा एक “डार्क कंप्यूट पावर” को दर्शाता है, जो सार्वजनिक आंकड़ों से हजारों गुना ज्यादा हो सकती है। बताया जा रहा है कि यह क्षमता Top500 सूची में दर्ज चीन की कंप्यूटिंग ताकत से करीब 6,000 गुना अधिक है।
दूसरी ओर United States अपनी AI कंप्यूटिंग क्षमता का कोई एक आधिकारिक आंकड़ा जारी नहीं करता, क्योंकि वहां का अधिकांश इंफ्रास्ट्रक्चर निजी कंपनियों के पास है और अलग-अलग मानकों से मापा जाता है। हालांकि, विशेषज्ञों के अनुसार अमेरिका के पास वैश्विक AI क्षमता का 50 से 75 प्रतिशत हिस्सा हो सकता है।
चीन के उप-मंत्री झांग युनमिंग ने बताया कि देश एक राष्ट्रव्यापी मल्टी-लेयर कंप्यूटिंग ग्रिड विकसित कर रहा है, जो AI उद्योग की रीढ़ बनेगा। इसका उद्देश्य राष्ट्रीय और स्थानीय स्तर पर कंप्यूटिंग पावर को बांटना और छोटे व्यवसायों के लिए इसे सुलभ बनाना है।
हालांकि, Top500 की ताजा रैंकिंग के अनुसार चीन का सबसे तेज ज्ञात सुपरकंप्यूटर 0.1 एक्साफ्लॉप्स से कम क्षमता का है, जबकि अमेरिका का El Capitan सुपरकंप्यूटर करीब 1.8 एक्साफ्लॉप्स क्षमता के साथ शीर्ष पर है।
विशेषज्ञों का मानना है कि बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और अमेरिकी निर्यात नियंत्रणों के चलते चीन अपनी उन्नत मशीनों की जानकारी सार्वजनिक नहीं कर रहा है, जिससे उसकी वास्तविक कंप्यूटिंग ताकत का अंदाजा लगाना मुश्किल हो गया है।
