दिल्ली हाईकोर्ट के अधिवक्ता सुमित जायसवाल की पहल से जागा सिस्टम, सड़क हादसा पीड़ितों के मुफ्त इलाज पर केंद्र सरकार का बड़ा निर्देश।

  • रिपोर्ट: जितेंद्र ठाकुर

उत्तर प्रदेश के कुशीनगर जिले के पडरौना निवासी और दिल्ली हाईकोर्ट के अधिवक्ता सुमित जायसवाल की पहल ने प्रशासनिक व्यवस्था को झकझोर कर रख दिया है। उनकी शिकायत के बाद केंद्र सरकार ने देशभर के जिलाधिकारियों और पुलिस अधीक्षकों को सड़क दुर्घटना पीड़ितों के मुफ्त इलाज संबंधी नियमों की याद दिलाते हुए आवश्यक निर्देश जारी किए हैं।

मामला 4 मई को लखनऊ में हुए एक सड़क हादसे से जुड़ा है, जिसमें पडरौना की रहने वाली प्रीति जायसवाल गंभीर रूप से घायल हो गई थीं। हादसे के बाद उन्हें एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया। घायल युवती की मदद के लिए पहुंचे अधिवक्ता सुमित जायसवाल ने अस्पताल प्रबंधन से प्रधानमंत्री राहत योजना के तहत कैशलेस और नि:शुल्क इलाज की मांग की। लेकिन अस्पताल प्रशासन ने इस योजना की जानकारी होने से इनकार कर दिया।

इसके बाद सुमित जायसवाल ने स्थानीय अधिकारियों से संपर्क किया, लेकिन वहां भी योजना को लेकर स्पष्ट जानकारी नहीं मिली। तब उन्होंने सीधे केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय में शिकायत दर्ज कराई।

शिकायत को गंभीरता से लेते हुए मंत्रालय के सचिव वी. उमाशंकर ने सभी जिलाधिकारियों और पुलिस अधीक्षकों को पत्र भेजकर 13 फरवरी 2026 को जारी शासनादेश का पालन सुनिश्चित कराने के निर्देश दिए हैं। आदेश में स्पष्ट किया गया है कि सड़क दुर्घटना में घायल व्यक्ति का किसी भी अस्पताल में डेढ़ लाख रुपये तक का इलाज पूरी तरह नि:शुल्क और कैशलेस होगा, बशर्ते संबंधित थाने में दुर्घटना की रिपोर्ट दर्ज हो।

केंद्र सरकार के हस्तक्षेप के बाद लखनऊ प्रशासन ने घायल प्रीति जायसवाल के नि:शुल्क इलाज की व्यवस्था शुरू कर दी है। वहीं सुमित जायसवाल की इस पहल की सराहना करते हुए उनके पिता एवं वरिष्ठ अधिवक्ता राजकुमार जायसवाल ने उन्हें बधाई दी है। यह मामला अब सड़क हादसा पीड़ितों के अधिकारों को लेकर एक महत्वपूर्ण उदाहरण बन गया है।

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