फरीदाबाद में रैपिड रेल कॉरिडोर परियोजना के लिए मंदिर और मस्जिद को ध्वस्त किए जाने के बाद अब नगर निगम की कार्रवाई नेहरू कॉलोनी तक पहुंच गई है। कॉलोनी में 8 हजार से अधिक मकान हैं, जिनमें करीब एक लाख लोग निवास करते हैं। नगर निगम ने अवैध निर्माण का हवाला देते हुए निवासियों को नोटिस जारी कर मकान खाली करने के निर्देश दिए हैं, जिससे पूरे क्षेत्र में चिंता और असमंजस का माहौल बना हुआ है।
शनिवार देर रात चौक पर स्थित मस्जिद को तोड़ने की कार्रवाई शुरू की गई थी। इसके बाद अब कॉलोनी के मकानों पर भी ध्वस्तीकरण की तलवार लटक रही है। कई परिवार अपने घरों से सामान निकालकर सुरक्षित स्थानों पर ले जाने लगे हैं। कुछ लोग ट्रकों और अन्य वाहनों में अपना सामान भरकर दूसरी जगह शिफ्ट हो चुके हैं, जबकि कई परिवार प्रशासन की अगली कार्रवाई का इंतजार कर रहे हैं।
हालांकि, कॉलोनी में रहने वाले अधिकांश परिवार पिछले 40 से 50 वर्षों से यहां बसे हुए हैं और वे अपने घर छोड़ने को तैयार नहीं हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि उनके पास रहने के लिए कोई वैकल्पिक व्यवस्था नहीं है। स्थिति को देखते हुए कई स्थानों पर बिजली और पानी के कनेक्शन भी काट दिए गए हैं।
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इस पूरे घटनाक्रम के बीच एक बड़ा सवाल राजनीतिक दलों की भूमिका को लेकर भी उठ रहा है। करीब एक लाख लोगों के आशियाने पर संकट मंडरा रहा है, लेकिन विपक्षी दल खुलकर सामने आते दिखाई नहीं दे रहे हैं। स्थानीय लोगों के बीच चर्चा है कि आखिर 8 हजार मकानों को तोड़े जाने के मुद्दे पर विपक्ष की आवाज इतनी कमजोर क्यों है। हालांकि, इस संबंध में किसी राजनीतिक दल या सरकारी एजेंसी की ओर से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।
फिलहाल नेहरू कॉलोनी के हजारों परिवारों की नजर प्रशासन और सरकार के अगले कदम पर टिकी हुई है। लोगों की मांग है कि यदि ध्वस्तीकरण किया जाता है तो उन्हें पर्याप्त समय और वैकल्पिक पुनर्वास की व्यवस्था भी उपलब्ध कराई जाए।
