ऐलनाबाद, 01मई( एम पी भार्गव ) हरियाणा में नया घर बनाने की तैयारी कर रहे लोगों के लिए बड़ी खबर है। राज्य सरकार ने चार मंजिला मकानों के निर्माण को लेकर नए नियम लागू किए हैं। अब मकान बनाने के लिए सिर्फ प्रशासनिक मंजूरी ही नहीं, बल्कि कई मामलों में पड़ोसियों की सहमति भी जरूरी होगी।
मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने जानकारी देते हुए बताया कि गुरुग्राम को छोड़कर पूरे हरियाणा में स्टिल्ट पार्किंग सहित चार मंजिला मकान केवल उन्हीं सड़कों पर बनाए जा सकेंगे, जिनकी चौड़ाई कम से कम 10 मीटर होगी। यानी संकरी गलियों और छोटी सड़कों पर अब ऐसे भवनों के निर्माण पर रोक रहेगी।
मुख्यमंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि इस तरह के निर्माण के लिए संबंधित मकान मालिक को अपने पड़ोसियों से अनापत्ति प्रमाण पत्र (NOC) लेना अनिवार्य होगा। बिना NOC के चार मंजिला भवन निर्माण को मंजूरी नहीं मिलेगी।
क्या होती है स्टिल्ट पार्किंग
स्टिल्ट पार्किंग का मतलब है कि मकान के ग्राउंड फ्लोर को खाली छोड़कर केवल वाहनों की पार्किंग के लिए इस्तेमाल किया जाए, जबकि ऊपर की मंजिलों पर आवासीय निर्माण किया जाए। इस मॉडल में नीचे पार्किंग और ऊपर रहने की व्यवस्था होती है।
सरकार ने क्यों लिया फैसला
सरकार का कहना है कि शहरी क्षेत्रों में तेजी से बढ़ती आबादी, ट्रैफिक जाम और पार्किंग की समस्या को देखते हुए यह फैसला लिया गया है। कई इलाकों में बहुमंजिला मकान बनने के बाद गाड़ियां सड़कों पर खड़ी होती हैं, जिससे आम लोगों को परेशानी होती है।
नए नियम लागू होने से यातायात व्यवस्था बेहतर होने, पार्किंग की सुविधा बढ़ने और अनियोजित निर्माण पर रोक लगने की उम्मीद जताई जा रही है।
किन लोगों पर पड़ेगा असर
इस फैसले का असर उन लोगों पर सबसे ज्यादा पड़ेगा, जो अब नया चार मंजिला मकान बनाने की योजना बना रहे हैं। ऐसे लोगों को पहले सड़क की चौड़ाई जांचनी होगी, फिर पड़ोसियों की सहमति लेनी होगी और उसके बाद ही नक्शा पास कराया जा सकेगा।
गुरुग्राम को क्यों रखा बाहर
सरकार ने गुरुग्राम को इस नियम से फिलहाल बाहर रखा है। माना जा रहा है कि वहां पहले से अलग शहरी विकास नीति और निर्माण नियम लागू हैं, इसलिए गुरुग्राम के लिए अलग प्रावधान रखे गए हैं।
लोगों की मिली-जुली प्रतिक्रिया
सरकार के इस फैसले पर लोगों की मिली-जुली प्रतिक्रिया सामने आ रही है। कुछ लोग इसे सही कदम बता रहे हैं, जबकि कुछ लोगों का कहना है कि पड़ोसियों की NOC जरूरी होने से अनावश्यक विवाद भी बढ़ सकते हैं। अब देखने वाली बात होगी कि यह नियम जमीनी स्तर पर कैसे लागू होता है।
