- रिपोर्ट- पंकज झा
वाराणसी। 1 मई को प्रस्तावित निषाद पार्टी की महा रैली से पहले सियासी माहौल अचानक गरमा गया है। भारतीय जनता पार्टी के सहयोगी दल निषाद पार्टी के कार्यकर्ताओं और नेताओं को रोकने के आरोप सामने आए हैं, जिससे राजनीतिक हलकों में हलचल तेज हो गई है।
बताया जा रहा है कि उत्तर प्रदेश सरकार में कैबिनेट मंत्री डॉ. संजय निषाद की रैली में शामिल होने जा रहे प्रमुख कार्यकर्ताओं—विनोद कुमार निषाद (राष्ट्रीय अध्यक्ष, मां गंगा निषाद राज सेवा समिति) और शिव कुमार निषाद (महानगर अध्यक्ष, निषाद पार्टी)—के घरों के बाहर भारी पुलिस बल तैनात कर दिया गया। आरोप है कि उनके घरों पर ताला लगाकर उन्हें बाहर निकलने से भी रोक दिया गया।
यह कार्रवाई उस समय हुई जब ये नेता वाराणसी के कटिंग मेमोरियल इंटर कॉलेज में आयोजित “जन अधिकार महारैली” में शामिल होने की तैयारी कर रहे थे। समर्थकों का कहना है कि यह कदम उनकी लोकतांत्रिक भागीदारी को बाधित करने और उनकी आवाज़ दबाने की कोशिश है।
घटना के बाद कार्यकर्ताओं में आक्रोश बढ़ गया है और इसे जन अधिकारों का हनन बताया जा रहा है। स्थानीय स्तर पर यह मामला अब राजनीतिक बहस का केंद्र बनता जा रहा है। एक ओर प्रशासन अपनी कार्रवाई को कानून-व्यवस्था बनाए रखने के दृष्टिकोण से देख सकता है, वहीं दूसरी ओर पार्टी समर्थक इसे राजनीतिक दबाव की रणनीति करार दे रहे हैं।
इस पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या लोकतांत्रिक व्यवस्था में राजनीतिक गतिविधियों में भाग लेना भी चुनौती बनता जा रहा है, या फिर यह केवल सुरक्षा और नियंत्रण का हिस्सा है—इसका स्पष्ट जवाब आने वाले समय में सामने आ सकता है।
