यूपी बार काउंसिल का बड़ा आदेश: आपराधिक मामलों वाले वकीलों की सूची 15 दिन में दें बार एसोसिएशन

प्रयागराज। उत्तर प्रदेश बार काउंसिल ने प्रदेश की सभी बार एसोसिएशनों को बड़ा निर्देश जारी करते हुए उन अधिवक्ताओं की सूची 15 दिनों के भीतर उपलब्ध कराने को कहा है, जिनके खिलाफ गंभीर आपराधिक मामले लंबित हैं। चेतावनी दी गई है कि निर्धारित समय में सूची उपलब्ध नहीं कराने वाली बार एसोसिएशन के विरुद्ध मान्यता रद्द करने जैसी कार्रवाई की जा सकती है और उसके सदस्यों को कल्याणकारी योजनाओं का लाभ भी नहीं मिलेगा।

बार काउंसिल के सचिव राम किशोर शुक्ल के हस्ताक्षर से जारी पत्र में कहा गया है कि यह कार्रवाई इलाहाबाद हाईकोर्ट के निर्देशों के अनुपालन में की जा रही है। हाईकोर्ट ने एक मामले की सुनवाई के दौरान गंभीर आपराधिक मुकदमों में आरोपित वकीलों पर कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा था कि ऐसे अधिवक्ता, जो बार एसोसिएशन के पदाधिकारी या प्रभावशाली पदों पर बने रहते हैं, कानून के शासन के लिए गंभीर चुनौती हैं। अदालत ने बार काउंसिल को ऐसे अधिवक्ताओं के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू करने का निर्देश भी दिया था।

निर्देश के अनुसार प्रत्येक बार एसोसिएशन को उन अधिवक्ताओं का पूरा विवरण भेजना होगा, जिनके विरुद्ध हत्या अथवा अन्य ऐसे अपराधों में एफआईआर दर्ज है, आरोपपत्र दाखिल हो चुका है या मामला न्यायालय में विचाराधीन है। यदि किसी बार एसोसिएशन ने तय समय में जानकारी उपलब्ध नहीं कराई तो इसे हाईकोर्ट के आदेश की अवहेलना माना जाएगा और इसकी रिपोर्ट अदालत को भेजी जाएगी।

बार काउंसिल ने यह भी स्पष्ट किया है कि प्रदेश में करीब 5,14,439 पंजीकृत अधिवक्ताओं में से 2,49,809 को ही प्रैक्टिस प्रमाणपत्र जारी किया गया है, जबकि 105 फर्जी नामांकन के मामले जांच के दायरे में हैं।

पुलिस रिपोर्ट के अनुसार प्रदेश के 75 जिलों में 4,157 अधिवक्ताओं के खिलाफ 5,056 आपराधिक मामले दर्ज हैं। इनमें 418 अधिवक्ताओं पर तीन या उससे अधिक मुकदमे लंबित हैं, जबकि 28 अधिवक्ताओं के खिलाफ 11 से अधिक एफआईआर दर्ज हैं। प्रयागराज के एक अधिवक्ता के खिलाफ सर्वाधिक 46 एफआईआर दर्ज होने का भी उल्लेख किया गया है। बार काउंसिल की इस पहल को अधिवक्ता पेशे की गरिमा और न्याय व्यवस्था में जनता का विश्वास बनाए रखने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

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