भगोड़े नीरव मोदी के प्रत्यर्पण का रास्ता साफ, यूरोपीय मानवाधिकार अदालत से भी नहीं मिली राहत

  • रिपोर्ट: सुरजीत सिंह

नई दिल्ली। पंजाब नेशनल बैंक (PNB) के बहुचर्चित हजारों करोड़ रुपये के घोटाले और उससे जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में फरार हीरा कारोबारी नीरव मोदी को भारत लाने की दिशा में बड़ी सफलता मिली है। यूरोपियन कोर्ट ऑफ ह्यूमन राइट्स (ECHR) ने उसकी याचिका खारिज कर दी है, जिसके बाद उसके पास उपलब्ध सभी कानूनी विकल्प समाप्त हो गए हैं। अब ब्रिटेन सरकार उसके भारत प्रत्यर्पण की प्रक्रिया को आगे बढ़ा सकती है।

रिपोर्ट के अनुसार, ब्रिटेन द्वारा भारत को प्रत्यर्पण संबंधी दस्तावेज सौंपने के निर्णय के बाद नीरव मोदी ने अप्रैल 2026 में ECHR का दरवाजा खटखटाया था। अदालत ने मामले को गोपनीय रखते हुए उसकी याचिका पर विचार किया, लेकिन अंततः उसे किसी प्रकार की राहत देने से इनकार कर दिया। इसके साथ ही प्रत्यर्पण में बची अंतिम कानूनी बाधा भी समाप्त हो गई है।

तीन मामलों में वांछित है नीरव मोदी

नीरव मोदी भारत में तीन प्रमुख मामलों में आरोपी है। पहला मामला PNB घोटाले का है, जिसकी जांच CBI कर रही है। दूसरा मामला इसी घोटाले से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग का है, जिसकी जांच प्रवर्तन निदेशालय (ED) कर रहा है। तीसरा मामला जांच के दौरान गवाहों और साक्ष्यों के साथ कथित छेड़छाड़ का है।

ब्रिटेन की तत्कालीन गृह सचिव प्रीति पटेल ने अप्रैल 2021 में उसके प्रत्यर्पण को मंजूरी दी थी। इसके बाद नीरव मोदी की कई जमानत याचिकाएं और अपीलें खारिज हो चुकी हैं। उसने भारत में प्रताड़ना की आशंका का हवाला देकर भी प्रत्यर्पण रोकने की कोशिश की थी, लेकिन उसे सफलता नहीं मिली।

ED ने जब्त की करोड़ों की संपत्ति

प्रवर्तन निदेशालय अब तक नीरव मोदी की 147.72 करोड़ रुपये से अधिक की संपत्तियां अटैच कर चुका है। इनमें मुंबई और सूरत की अचल संपत्तियां, आठ लग्जरी कारें, ज्वेलरी, पेंटिंग, प्लांट और मशीनरी शामिल हैं। इसके अलावा विदेशों में भी उसकी संपत्तियों पर कार्रवाई जारी है। हांगकांग में 253 करोड़ रुपये से अधिक की संपत्ति जब्त की जा चुकी है, जबकि इससे पहले नीरव मोदी और उसके परिजनों की 637 करोड़ रुपये से अधिक की संपत्तियां भी अटैच की गई थीं।

बैंक ऑफ इंडिया को चुकाने होंगे 108 करोड़ रुपये

इस बीच लंदन हाई कोर्ट ने भी नीरव मोदी के खिलाफ बड़ा फैसला सुनाया है। अदालत ने उसे बैंक ऑफ इंडिया को करीब 1.15 करोड़ डॉलर (लगभग 108 करोड़ रुपये) का भुगतान करने का निर्देश दिया है। यह मामला दुबई स्थित कंपनी फायरस्टार डायमंड एफजेडई को दिए गए ऋण के लिए नीरव मोदी द्वारा दी गई व्यक्तिगत गारंटी से जुड़ा है। अदालत ने बैंक की मांग को वैध मानते हुए नीरव मोदी की दलीलों को खारिज कर दिया।

क्या था PNB घोटाला?

साल 2018 में सामने आए पंजाब नेशनल बैंक घोटाले ने पूरे देश को झकझोर दिया था। शुरुआती तौर पर करीब 13 हजार करोड़ रुपये और बाद में लगभग 13,500 करोड़ रुपये के इस घोटाले में नीरव मोदी, उसके मामा मेहुल चोकसी और उनकी शेल कंपनियों पर आरोप लगे। आरोप था कि मुंबई के ब्रैडी हाउस शाखा के कुछ कर्मचारियों की मिलीभगत से फर्जी लेटर ऑफ अंडरटेकिंग (LoU) जारी कराए गए। इन्हीं के आधार पर विदेशी बैंकों की भारतीय शाखाओं से हजारों करोड़ रुपये का कर्ज लिया गया, जबकि इन लेन-देन का रिकॉर्ड बैंक के कोर बैंकिंग सिस्टम में दर्ज ही नहीं किया गया।

कैसे उजागर हुआ घोटाला?

जनवरी 2018 में जब नीरव मोदी समूह ने नए LoU की मांग की, तब बैंक अधिकारियों ने नियमित प्रक्रिया के तहत गारंटी मांगी। जांच में सामने आया कि पहले जारी किए गए LoU का कोई रिकॉर्ड बैंक के सिस्टम में मौजूद नहीं था। इसके बाद मामला उजागर हुआ और CBI तथा ED ने व्यापक जांच शुरू की।

घोटाले के बाद भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने LoU और Letter of Comfort (LoC) जारी करने की सुविधा बंद कर दी। साथ ही बैंकों के SWIFT मैसेजिंग सिस्टम और कोर बैंकिंग सिस्टम के बीच इंटीग्रेशन अनिवार्य किया गया तथा बड़े बैंकिंग लेन-देन की निगरानी और ऑडिट व्यवस्था को और सख्त बनाया गया।

जांच की मौजूदा स्थिति

घोटाला सामने आने के बाद नीरव मोदी और मेहुल चोकसी 2018 में भारत छोड़कर फरार हो गए थे। नीरव मोदी को वर्ष 2019 में लंदन में गिरफ्तार किया गया और वह फिलहाल वहीं जेल में बंद है। दूसरी ओर, मेहुल चोकसी के प्रत्यर्पण को लेकर भी कानूनी प्रक्रिया जारी रही। जांच एजेंसियों ने भारत और विदेशों में उनकी हजारों करोड़ रुपये की संपत्तियां जब्त की हैं तथा कई बैंक अधिकारियों और संबंधित कंपनियों के खिलाफ आरोपपत्र भी दाखिल किए जा चुके

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