लौकी से बढ़ाएं सेहत का खजाना: वजन, पाचन और दिल को मिलते हैं कई फायदे

  • रिपोर्ट: प्राची सिंह

अक्सर बचपन में मां हमें अच्छी सेहत के लिए हरी सब्जियां खाने की सलाह देती थीं। इनमें लौकी ऐसी सब्जी है, जिसे भले ही हर कोई पसंद न करता हो, लेकिन आयुर्वेद में इसे बेहद गुणकारी माना गया है। पानी, फाइबर और कई आवश्यक पोषक तत्वों से भरपूर लौकी शरीर को स्वस्थ रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

आयुर्वेद में लौकी को संतुलित आहार का महत्वपूर्ण हिस्सा माना गया है। यह न सिर्फ पाचन तंत्र को मजबूत करती है, बल्कि वजन नियंत्रण, हृदय स्वास्थ्य और शरीर की प्राकृतिक सफाई में भी मददगार मानी जाती है।

10 हजार साल पुराना है लौकी का इतिहास
लौकी, जिसे अंग्रेजी में बॉटल गॉर्ड (Bottle Gourd) या कैलाबाश (Calabash) कहा जाता है, भारत में दूधी और घिया के नाम से भी जानी जाती है। इसमें लगभग 90 प्रतिशत पानी होता है।

इतिहासकारों के अनुसार इसकी खेती करीब 10 हजार वर्ष पहले दक्षिणी अफ्रीका में शुरू हुई थी। भारत में इसका संबंध मालाबार क्षेत्र और देहरादून से माना जाता है। हिंदू, जैन और बौद्ध परंपराओं में भी लौकी का विशेष धार्मिक महत्व है और इसका उल्लेख अथर्ववेद तथा महाभारत जैसे प्राचीन ग्रंथों में मिलता है।

आयुर्वेद के अनुसार लौकी के 5 बड़े फायदे

  • 1. वजन नियंत्रित रखने में मददगार- लौकी में कैलोरी और वसा की मात्रा बेहद कम होती है। यह पेट को लंबे समय तक भरा हुआ महसूस कराती है और अनावश्यक भूख को नियंत्रित करने में मदद कर सकती है।
  • 2. पाचन तंत्र को मजबूत बनाती है- फाइबर और पानी से भरपूर होने के कारण लौकी कब्ज, गैस, एसिडिटी और पेट फूलने जैसी समस्याओं से राहत दिलाने में सहायक मानी जाती है।
  • 3. शरीर को डिटॉक्स करने में सहायक- आयुर्वेद में इसे ‘मूत्रशोधन’ कहा गया है, जिसका अर्थ है शरीर और मूत्र तंत्र की सफाई में सहायता करना। यह शरीर से अपशिष्ट पदार्थों को बाहर निकालने में मदद कर सकती है।
  • 4. हृदय स्वास्थ्य के लिए लाभकारी- लौकी की शीतल प्रकृति रक्तचाप को संतुलित रखने और इलेक्ट्रोलाइट संतुलन बनाए रखने में मददगार मानी जाती है।
  • 5. शरीर में पानी की कमी नहीं होने देती- इसमें पानी की मात्रा अधिक होने के कारण यह शरीर को हाइड्रेट रखने में भी मदद करती है।

लौकी का सेवन इन तरीकों से कर सकते हैं

  • लौकी और सेब का जूस
    ताजा लौकी के रस में पुदीना, इलायची और सेब का रस मिलाकर सेवन किया जा सकता है। इसे स्वादिष्ट और पौष्टिक विकल्प माना जाता है।
  • लौकी और धनिया का स्टू
    उबली हुई लौकी में धनिया के बीज या हरी धनिया मिलाकर तैयार किया गया स्टू पाचन और मूत्र तंत्र के लिए लाभकारी माना जाता है।
  • लौकी और आंवला जूस
    लौकी, आंवला, अदरक और सेंधा नमक का मिश्रण प्रतिरक्षा क्षमता बढ़ाने और पाचन को बेहतर बनाने में मददगार माना जाता है।

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