- रिपोर्ट: सुरजीत सिंह
उत्तर प्रदेश। सरकारी विभागों के बीच समन्वय की कमी का एक और मामला सामने आया है, जहां करोड़ों रुपये खर्च कर बिछाई गई जलापूर्ति पाइपलाइन अब सड़क चौड़ीकरण के कार्य के कारण क्षतिग्रस्त हो रही है। इस घटना ने विकास परियोजनाओं की योजना और क्रियान्वयन व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
सात करोड़ रुपये की पाइपलाइन सड़क निर्माण की भेंट चढ़ी
नगर निगम की ओर से हड़हवा फाटक से गोरखनाथ थाना होते हुए एचएन सिंह चौराहे तक लगभग सात करोड़ रुपये की लागत से जलापूर्ति पाइपलाइन बिछाई गई थी। इसका उद्देश्य क्षेत्र में पेयजल आपूर्ति व्यवस्था को सुदृढ़ करना और लोगों को बेहतर सुविधा उपलब्ध कराना था।
लेकिन अब उसी मार्ग पर लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) द्वारा सड़क चौड़ीकरण का कार्य कराया जा रहा है। निर्माण के दौरान कई स्थानों पर पाइपलाइन टूटने लगी है, जिससे जलापूर्ति प्रभावित होने की आशंका बढ़ गई है।
समन्वय की कमी से जनता के पैसे की बर्बादी
स्थानीय लोगों का कहना है कि सरकार एक ओर विकास कार्यों पर करोड़ों रुपये खर्च कर रही है, वहीं दूसरी ओर विभागों के बीच आपसी तालमेल के अभाव में वही परियोजनाएं नुकसान का कारण बन रही हैं।
लोगों ने इसे सार्वजनिक धन की बर्बादी बताते हुए जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय करने की मांग की है।
मरम्मत पर बढ़ सकता है अतिरिक्त खर्च
सूत्रों के मुताबिक, सड़क निर्माण के दौरान हुई खुदाई और भारी मशीनों के इस्तेमाल से पाइपलाइन कई जगह प्रभावित हुई है। इससे भविष्य में मरम्मत और पुनर्निर्माण पर अतिरिक्त खर्च का बोझ भी बढ़ सकता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि सड़क निर्माण शुरू होने से पहले नगर निगम और लोक निर्माण विभाग के बीच बेहतर समन्वय स्थापित किया जाता, तो इस स्थिति से आसानी से बचा जा सकता था।
स्थानीय लोगों ने उठाई संयुक्त कार्ययोजना की मांग
स्थानीय नागरिकों ने पाइपलाइन की तत्काल मरम्मत कराने और भविष्य में ऐसी लापरवाही रोकने की मांग की है। साथ ही दोनों विभागों से संयुक्त योजना बनाकर विकास कार्यों को आगे बढ़ाने की अपील की गई है।
फिलहाल, विभागों के बीच तालमेल की कमी का खामियाजा आम जनता को भुगतना पड़ रहा है और करोड़ों रुपये की परियोजना सवालों के घेरे में आ गई है।
