न जाने कब सुधरेगा गोदौलिया चौराहा? ऑटो-टोटो के आगे पुलिस खामोश 

  • रिपोर्ट- पंकज झा

वाराणसी का गोदौलिया चौराहा, जो शहर की पहचान और सबसे व्यस्त मार्गों में से एक माना जाता है, रात होते ही अव्यवस्था का पर्याय बन जाता है। जैसे-जैसे शाम ढलती है, वैसे-वैसे चौराहे पर ऑटो और टोटो चालकों का कब्जा बढ़ने लगता है। हालत यह हो जाती है कि सड़क के किनारे ही नहीं, बल्कि चौराहे और पुलिस चौकी के आसपास तक वाहन एक लंबी कतार में खड़े कर दिए जाते हैं, मानो वहां किसी अधिकृत वाहन स्टैंड का संचालन हो रहा हो।

सबसे चिंताजनक बात यह है कि यह पूरा नजारा पुलिस चौकी के आसपास देखने को मिलता है। चौकी के पास तक ऑटो और टोटो खड़े कर दिए जाते हैं, जिससे आम लोगों के आवागमन में बाधा उत्पन्न होती है। राहगीरों, दोपहिया और चारपहिया वाहन चालकों को संकरी होती सड़क और जाम जैसी स्थिति का सामना करना पड़ता है, लेकिन व्यवस्था संभालने वाले जिम्मेदार विभागों की ओर से कोई ठोस कार्रवाई नजर नहीं आती।

स्थानीय लोगों का कहना है कि ऑटो और टोटो चालकों के हौसले इतने बुलंद हो चुके हैं कि उन्हें न पुलिस का डर दिखाई देता है और न ही ट्रैफिक नियमों की परवाह। जिस तरह खुलेआम सड़क पर कब्जा कर वाहन खड़े किए जाते हैं, उससे ऐसा प्रतीत होता है कि रात होते ही गोदौलिया चौराहा एक अस्थायी वाहन स्टैंड में तब्दील हो जाता है।

यही वजह है कि लोगों के बीच अब सवाल उठने लगे हैं कि आखिर पुलिस की मौजूदगी के बावजूद यह स्थिति क्यों बनी हुई है? जब नियमों का उल्लंघन खुलेआम हो रहा है तो कार्रवाई क्यों नहीं होती? आखिर पुलिस की चुप्पी का कारण क्या है? जनता पूछ रही है कि ऐसा कौन-सा कारण है कि ऑटो और टोटो चालकों पर सख्ती नहीं दिखाई जाती, जबकि आम नागरिकों से नियमों का पालन कराने में कोई ढिलाई नहीं बरती जाती।

यदि समय रहते इस समस्या पर ध्यान नहीं दिया गया तो गोदौलिया चौराहा अपनी पहचान यातायात केंद्र के रूप में नहीं, बल्कि अव्यवस्था, अतिक्रमण और प्रशासनिक निष्क्रियता के उदाहरण के रूप में बनाने लगेगा। स्थानीय लोगों की मांग है कि चौराहे पर अवैध रूप से खड़े होने वाले ऑटो और टोटो वाहनों के खिलाफ नियमित अभियान चलाया जाए, सड़क को अतिक्रमण मुक्त कराया जाए और आम जनता को जाम तथा परेशानी से राहत दिलाई जाए।

जनता का सीधा सवाल है—न जाने कब सुधरेगा गोदौलिया चौराहा? और जब सब कुछ पुलिस चौकी के सामने हो रहा है, तो आखिर पुलिस क्यों नहीं बोलती और कार्रवाई क्यों नहीं करती?

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