गीता केवल ज्ञान का ग्रंथ नहीं, बल्कि आत्म जागृति का संदेश है: साध्वी सौम्या भारती जी

ऐलनाबाद, 03 जून (एम पी भार्गव): दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान द्वारा आयोजित पाँच दिवसीय श्रीकृष्ण कथा में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ रही है। कथा के दौरान साध्वी सुश्री सौम्या भारती जी ने प्रभु कथा का रसपान करवाते हुए कहा कि ईश्वर शक्ति समय-समय पर धर्म की स्थापना के लिए अवतरित होती है। प्रभु श्रीराम ने रावण का वध कर रामराज्य की स्थापना की और श्रीकृष्ण ने कंस का संहार कर धर्म की पुनर्स्थापना की।

इस अवसर पर यजमान के रूप में दीपक अरोड़ा (अध्यक्ष, अरोड़वंश सभा) उपस्थित रहे। कार्यक्रम में अतिथि के रूप में राजीव वधवा (शहरी उप प्रधान भाजपा), नितिन सोमानी , कन्हैया लाल बंसल , हरीश अरोड़ा , वकील सिंह , सतनाम सिंह , चंद्र कुमार , धीरज मेहता , डॉक्टर अंकिता अरोड़ा , नीरज कटारिया जी, मंगतराम हिसारिया एवं अशोक कुमार ने भी अपनी उपस्थिति दर्ज करवाई।

The Gita is not merely a scripture of knowledge, but a message of self-awakening: Sadhvi Soumya Bharti Ji.

साध्वी जी ने कहा कि जब-जब शासक अपने कर्तव्यों से भटक जाता है और प्रजा का शोषण करने लगता है, तब धर्म की रक्षा के लिए भगवान को अवतरित होना पड़ता है। उन्होंने श्रीकृष्ण की लीलाओं का वर्णन करते हुए बताया कि उन्होंने एक ओर गोप-गोपिकाओं के माध्यम से प्रेम और भक्ति का संदेश दिया, वहीं दूसरी ओर गीता के रूप में संपूर्ण मानवता को ज्ञान का अमृत प्रदान किया।

The Gita is not merely a scripture of knowledge, but a message of self-awakening: Sadhvi Soumya Bharti Ji.

उन्होंने कहा कि गीता मानव जीवन में नवचेतना का संचार करती है और कर्मयोग के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देती है। गीता केवल ज्ञान का ग्रंथ नहीं, बल्कि आत्म जागृति का संदेश है। महात्मा गांधी जी ने गीता को अपनी माता के समान बताया, वहीं लोकमान्य तिलक जी ने इसे जीवन संघर्ष में सफलता का मार्गदर्शक माना।

साध्वी जी ने वर्तमान समाज पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि आज लोग गीता के संदेश को आत्मसात नहीं कर पा रहे हैं, जिसके कारण अधर्म बढ़ रहा है। यदि हमें सच्चा भक्त बनना है तो भगवान श्रीकृष्ण द्वारा बताए गए धर्म मार्ग पर चलना आवश्यक है।

कथा के अंत में प्रभु की पावन आरती का गायन किया गया, जिसमें उपस्थित श्रद्धालु भाव-विभोर हो उठे।

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