मध्य-पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच ईरान ने बड़ा दावा किया है कि वह अमेरिका के किसी भी संभावित जमीनी हमले का सामना करने के लिए पूरी तरह तैयार है। ईरानी पक्ष के अनुसार, देश में 10 लाख से ज्यादा लड़ाके तैनात किए गए हैं, जो जरूरत पड़ने पर मोर्चा संभाल सकते हैं।
यह बयान ऐसे समय में सामने आया है, जब डोनाल्ड ट्रंप की ओर से ईरान के खिलाफ कड़े रुख के संकेत मिल रहे हैं। हालांकि, अमेरिका ने फिलहाल कूटनीति को प्राथमिकता देते हुए सैन्य कार्रवाई को 6 अप्रैल तक टाल रखा है।
जानकारी के मुताबिक, अमेरिका ने युद्ध की संभावित स्थिति को देखते हुए अपने सैन्य बेड़े को तैयार कर लिया है। इसमें तीन विमानवाहक पोत और एक बड़ा एम्फीबियस असॉल्ट शिप शामिल है, जिन पर 4000 से अधिक मरीन तैनात हैं और वे आदेश का इंतजार कर रहे हैं।
ईरान के सरकारी मीडिया का दावा है कि होरमुज़ जलडमरूमध्य को लेकर स्थिति को देखते हुए बड़े पैमाने पर सैनिकों की तैनाती की गई है, ताकि किसी भी बाहरी हमले का जवाब दिया जा सके।
इसी बीच यह भी खबरें सामने आ रही हैं कि अमेरिका और इजरायल के लगातार दबाव के बाद ईरान परमाणु नीति को लेकर सख्त रुख अपना सकता है। रिपोर्ट्स के अनुसार, तेहरान के नेतृत्व में Islamic Revolutionary Guard Corps का प्रभाव बढ़ रहा है और वह परमाणु हथियार बनाने के विकल्प पर विचार कर सकता है।
संकेत मिल रहे हैं कि ईरान परमाणु अप्रसार संधि से बाहर निकलने और अब तक की बातचीत समाप्त करने पर भी विचार कर रहा है। हालांकि, पूर्व सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई ने परमाणु हथियारों को इस्लाम के तहत ‘हराम’ बताया था।
विशेषज्ञों का मानना है कि मौजूदा हालात में मध्य-पूर्व में तनाव और बढ़ सकता है, जिससे वैश्विक स्तर पर सुरक्षा और ऊर्जा आपूर्ति पर असर पड़ने की आशंका है।
