वैदिक पंचांग के अनुसार 5 दिसंबर 2025, शुक्रवार से पौष माह की शुरुआत हो चुकी है। यह हिंदी कैलेंडर का दसवां महीना होता है और धार्मिक मान्यताओं के लिहाज़ से बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। पौष माह को छोटा पितृ पक्ष भी कहा जाता है, क्योंकि इस अवधि में पितरों का तर्पण करने से उनकी आत्मा को शांति मिलती है और घर-परिवार पर पितरों की कृपा बनी रहती है।
क्यों कहा जाता है इसे पौष माह?
मान्यता है कि इस महीने में चंद्रमा पुष्य नक्षत्र के समीप रहता है, इसी कारण इसका नाम पौष पड़ा। इस मास में खरमास भी विशेष रूप से आता है, जिसके कारण विवाह, गृह-प्रवेश, सगाई, मुंडन जैसे मांगलिक कार्यों पर रोक रहती है।
पितृ तर्पण का महत्व
पुराणों में वर्णित है कि पौष मास में तर्पण करने से —
पितृदोष से मुक्ति मिलती है
शनिदोष का प्रभाव कम होता है
घर में सुख-समृद्धि और शांति बढ़ती है
पौष माह में तर्पण के लिए विशेष तिथियां
धनु संक्रांति — 16 दिसंबर 2025
इस दिन सूर्य देव के धनु राशि में प्रवेश करने पर तर्पण अत्यंत शुभ माना जाता है।
तिल, गुड़, कंबल, अनाज दान का विशेष महत्व
गरीबों और जरूरतमंदों की सेवा लाभदायी
पौष अमावस्या
इस अमावस्या को पितृ तर्पण का सर्वश्रेष्ठ दिन माना गया है। विधि-विधान से श्राद्ध करने पर पितर प्रसन्न होकर घर-परिवार पर आशीर्वाद बरसाते हैं।
पौष माह के शनिवार
हर शनिवार शनि उपासना के साथ तर्पण करने से
शनि की पीड़ा कम होती है
काले कुत्ते को भोजन कराना शुभ फलदायी
क्या न करें इस माह में?
विवाह, शुभ कार्य, गृह प्रवेश जैसे कार्यक्रमों से परहेज़
किसी भी तरह के अशुभ कार्य या गलत आदतों से दूरी बनाए रखें
पौष माह आस्था और श्रद्धा से जुड़ा समय है। इस मास में पितरों को स्मरण कर उनका आशीष प्राप्त किया जाए, तो जीवन में खुशहाली और संतुलन बढ़ता है।
पितृ कृपा बनी रहे, सभी के जीवन में शांति और समृद्धि आए — इसी शुभकामना के साथ।
डिस्क्लेमर- यहां दी गई जानकारियां सामाजिक और धार्मिक आस्थाओं पर आधारित हैं। khabrejunction.com इनकी पुष्टि नहीं करता।
