सुनीता दुग्गल:: जो हार कर भी जीत गई

रतिया (सी एम ग्रोवर प्रेसवार्ता) “न छेड़ किस्सा उल्फत का,बड़ी लंबी कहानी है,मैं गैरों से नहीं हारी, मुझे हराने में अपनों की मेहरबानी है” यह पंक्तियां खरा उतरती है भाजपा की राष्ट्रीय नेत्री व पूर्व सांसद सुनीता दुग्गल पर,जो लोकसभा चुनाव में टिकट से वंचित रहने के बाद रतिया विधानसभा क्षेत्र से चुनाव नहीं जीत सकी। वर्तमान में प्रदेश में भाजपा की सरकार है और इस विधानसभा क्षेत्र से कांग्रेस के विधायक हैं। एक सर्वेक्षण में यह उभर कर सामने आया है कि सुनीता दुग्गल चुनाव में अपनों की वजह से जीत नहीं पाई,वरना आज भी क्षेत्र में लोकप्रियता तथा विशेष पहचान रखती है।शहर हो या ग्रामीण आंचल के हर छोटे बड़े सार्वजनिक, सामाजिक व धार्मिक कार्यक्रम में सुनीता दुग्गल की उपस्थिति देखी गई है। दुःख सुख की भागीदार कार्यकर्ताओं से जनसंपर्क बनाए रखने वाली भाजपा की यह आयरन लेडी की पराजय को लेकर क्षेत्र के लोगों में पछतावा साफ दिखाई दे रहा है और वह अपनी चुनावी भूल को स्वीकारते हुए मानते हैं कि यदि वह बहकावे में आकर अपना गलत निर्णय न देते तो भाजपा सरकार में सुनीता दुग्गल की भागीदारी होती और क्षेत्र में विकास कार्यों की गंगा बहती। प्रदेश में भाजपा सरकार होने के कारण सुनीता दुग्गल अपनी पराजय को भूलकर आमजन की उम्मीद पर खरा उतर रही है, समस्याओं के समाधान के प्रति गंभीर रहती है। काबिले गौर है कि लोकसभा क्षेत्र सिरसा के नौ विधानसभा क्षेत्र में मात्र एक पर ही भगवा फहरा रहा है।

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