1978 यूपी के दंगों का सच: संभल की दर्दनाक घटना पर बन रही फिल्म

उत्तर प्रदेश के संभल में वर्ष 1978 में हुए सांप्रदायिक दंगों की सच्चाई को उजागर करने के लिए एक फिल्म बनाई जा रही है। इस फिल्म में उस भयावह दौर को दिखाया जाएगा, जब हिंसा के बीच बनवारीलाल गोयल और रामचंद्र दास की हत्या कर दी गई थी। उस समय यह घटना क्षेत्र की सबसे खतरनाक और हिंसक घटनाओं में गिनी गई थी।

इतिहास का काला अध्याय

फिल्म में उन आंकड़ों को भी सामने लाने का दावा किया गया है, जिनमें पहले 184 और बाद में 209 लोगों की मौत का जिक्र है। स्थानीय लोगों के अनुसार, दंगों के बाद कई दिनों तक इलाके में तनाव का माहौल बना रहा। बड़ी संख्या में लोगों के मारे जाने और घायल होने की वजह से यह घटना इतिहास के काले अध्याय के रूप में दर्ज हो गई।

योगी आदित्यनाथ का बयान

उत्तर प्रदेश विधानसभा में इस घटना का जिक्र करते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा था कि हिंसा के कारण कई परिवारों को पलायन करना पड़ा। उन्होंने एक व्यापारी की घटना का जिक्र करते हुए बताया कि उसकी मदद करने के कारण उसके हाथ-पैर काट दिए गए थे।

फिल्म में दिखेगी पूरी सच्चाई

फिल्म के निर्माता के अनुसार, इस प्रोजेक्ट के जरिए उन तथ्यों को सामने लाने की कोशिश की जा रही है, जो अब तक इतिहास के पन्नों में दबे हुए हैं। फिल्म में दंगों के दौरान हुई कथित घटनाओं और उसके बाद के सामाजिक प्रभावों को विस्तार से दिखाया जाएगा।

कोर्टरूम और 2024 का घटनाक्रम भी शामिल

फिल्म में केवल 1978 की घटनाएं ही नहीं, बल्कि 2024 के हालिया घटनाक्रम को भी जोड़ा गया है। इसमें हरिहर मंदिर और जामा मस्जिद से जुड़े विवाद पर एक अहम कोर्टरूम सीन भी फिल्माया जा रहा है, जिसमें अदालत के फैसले को दिखाया जाएगा।

प्रशासन की भूमिका भी दिखेगी

फिल्म यह भी दर्शाएगी कि कैसे 2024 में प्रशासन—मुख्यमंत्री, डीएम और एसपी—की सतर्कता के कारण संभावित बड़े दंगों को टाला गया। वर्तमान शूटिंग के दौरान कलाकारों के बीच तीखी अदालती बहस के दृश्य भी फिल्माए जा रहे हैं।

स्टारकास्ट और शूटिंग

इस फिल्म की शूटिंग संभल जिले के कई इलाकों में अगले डेढ़ से दो महीनों तक की जाएगी। फिल्म में अन्नू कपूर, महेश मांजरेकर और विजय राज जैसे दिग्गज कलाकार नजर आएंगे। फिल्म का निर्देशन भरत एस. श्रीनेत कर रहे हैं, जबकि निर्माण अमित जानी द्वारा किया जा रहा है।

यह फिल्म न केवल इतिहास के एक विवादित और संवेदनशील अध्याय को सामने लाने का दावा करती है, बल्कि समाज को उस दौर की सच्चाइयों से रूबरू कराने का प्रयास भी है।

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