कैंसर के इलाज में क्रांतिकारी सफलता: अब बिना सर्जरी और कीमोथेरेपी के संभव हुआ इलाज

इम्यूनोथेरेपी से पेट, मलाशय और अन्य अंगों के कैंसर का सफल उपचार, मरीजों को मिला नया जीवन

कैंसर के इलाज में क्रांतिकारी सफलता: अब बिना सर्जरी और कीमोथेरेपी के संभव हुआ इलाज

 

पेट, अन्ननली (esophagus), मलाशय (rectum) और अन्य अंगों में ठोस ट्यूमर वाले कैंसर मरीजों के लिए अब उम्मीद की नई किरण सामने आई है। मेमोरियल स्लोन केटरिंग कैंसर सेंटर (Memorial Sloan Kettering Cancer Center) के शोधकर्ताओं ने एक इम्यूनोथेरेपी दवा डोस्टारलिमैब (dostarlimab) का उपयोग कर चौंकाने वाले नतीजे हासिल किए हैं।


103 मरीजों पर हुआ परीक्षण, 84 को पूरी तरह से राहत:
इस परीक्षण में 103 मरीजों को शामिल किया गया, जिनमें से 49 को मलाशय का कैंसर था। इन सभी मरीजों के ट्यूमर पूरी तरह गायब हो गए और पांच साल बाद भी वापस नहीं आए। अन्य 54 मरीजों में से 35 को पेट, अन्ननली, लिवर, एंडोमेट्रियम, मूत्राशय और प्रोस्टेट जैसे अंगों में कैंसर था, और इन सभी में भी ट्यूमर गायब हो गए।


सिर्फ 5 मरीजों में कैंसर की वापसी, फिर भी इलाज सफल:
सभी 103 मरीजों में से सिर्फ पांच मरीजों में कैंसर की वापसी हुई, जिनमें से चार को फिर से इम्यूनोथेरेपी दी गई या छोटी सर्जरी कर ट्यूमर हटाया गया। इन सभी में अब तक बीमारी के कोई लक्षण नहीं हैं।


डॉ. लुइस ए. डियाज़ और डॉ. एंड्रिया सेर्सेक के नेतृत्व में यह शोध अमेरिकन एसोसिएशन फॉर कैंसर रिसर्च की वार्षिक बैठक और न्यू इंग्लैंड जर्नल ऑफ मेडिसिन में प्रकाशित हुआ है। जॉन हॉपकिन्स यूनिवर्सिटी के डॉ. बर्ट वोगेलस्टीन ने इसे “ग्राउंडब्रेकिंग” यानी ऐतिहासिक बताया है।


कैंसर की कमजोर कड़ी पर किया गया हमला:
इन मरीजों के ट्यूमर में एक खास प्रकार का जीनिक दोष पाया गया जिसे मिसमैच रिपेयर म्यूटेशन कहते हैं। इससे डीएनए की मरम्मत नहीं हो पाती और ट्यूमर में असामान्य प्रोटीन बनने लगते हैं, जिन्हें इम्यून सिस्टम आसानी से पहचान सकता है — बशर्ते ट्यूमर द्वारा बनाए गए सुरक्षा कवच को हटाया जाए। डोस्टारलिमैब यही सुरक्षा कवच हटाने में सक्षम है।


इलाज आसान नहीं, महंगा भी है:
यह दवा बहुत महंगी है — लगभग ₹9 लाख ($11,000) प्रति खुराक। छह महीनों में नौ बार इन्फ्यूजन की जरूरत होती है। फिलहाल यह दवा केवल कुछ विशेष कैंसरों के लिए स्वीकृत है, लेकिन मेमोरियल स्लोन केटरिंग अभी भी अपने ट्रायल में मरीजों को भर्ती कर रहा है, जिससे योग्य मरीजों को यह दवा निःशुल्क मिल सकती है।


71 वर्षीय मरीज़ की कहानी बनी प्रेरणा:
मॉरीन सिडेरिस, 71 वर्षीय महिला, जिन्हें 2022 में पता चला कि उनकी अन्ननली और पेट के मिलन बिंदु पर ट्यूमर है, ने इस ट्रायल में भाग लिया। तीन महीनों के भीतर उनका ट्यूमर गायब हो गया। सर्जरी, कीमोथेरेपी और रेडिएशन से बचते हुए अब वह केवल एक मामूली साइड इफेक्ट — एड्रिनल ग्रंथि के लिए दवा लेने की जरूरत से जूझ रही हैं।


एक बड़ी उम्मीद की ओर कदम:
एम. डी. एंडरसन कैंसर सेंटर के डॉ. माइकल ओवरमैन ने कहा, “यह परिणाम दिखाते हैं कि इम्यूनोथेरेपी अब एक वैध और प्रभावी इलाज बन चुकी है।”
हालांकि, हर मरीज के लिए यह संभव नहीं होगा, लेकिन यह ट्रायल कैंसर उपचार की दिशा में एक ऐतिहासिक मोड़ साबित हो सकता है।

 

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