UP: आदेश की अवहेलना पर डीएम रामपुर के खिलाफ एक्शन, मानवाधिकार आयोग ने जारी किया 50 हजार का जमानती वारंट
- रिपोर्ट: शाहबाज़ खां
उत्तर प्रदेश मानवाधिकार आयोग ने एक सेवानिवृत्त कर्मचारी की न्याय की गुहार को नजर अंदाज करने और बार-बार आदेश के बावजूद रिपोर्ट न सौंपने पर रामपुर के जिलाधिकारी के खिलाफ कड़ा रुख अपनाया है। आयोग के सदस्य न्यायमूर्ति राजीव लोचन मेहरोत्रा ने जिलाधिकारी के इस आचरण को अत्यंत आपत्तिजनक माना है। उन्होंने डीएम के खिलाफ 50 हजार रुपये का जमानती वारंट जारी कर एसपी रामपुर को निर्देश दिया है कि वह वारंट की तामील तय समय में करवाएं।
दरअसल, रामपुर के ज्वाला नगर निवासी महेश चंद्र सक्सेना 28 फरवरी 1999 को सहायक रजिस्ट्रार कानूनगो के पद से स्वैच्छिक सेवानिवृत्त हुए थे। पीड़ित के मुताबिक, शासन के आदेशानुसार, सहायक रजिस्ट्रार कानूनगो और रजिस्ट्रार कानूनगो का वेतनमान बराबर (1200-2040 रुपये) कर दिया गया था, लेकिन उन्हें इसका लाभ नहीं दिया गया।
नतीजतन उनकी पेंशन नहीं बढ़ी। इतना ही नहीं, वर्ष 1986 में लेखपाल पद पर रहने के दौरान उनका 5 माह का वेतन और सेवानिवृत्ति से पहले अक्तूबर 1998 से फरवरी 1999 तक का वेतन भी रोक लिया गया, जो आज तक नहीं मिला।
डीएम के खिलाफ जमानती वारंट जारी
बुजुर्ग अब बीमार और चलने-फिरने में असमर्थ हैं। कई वर्षों तक डीएम रामपुर के यहां सुनवाई नहीं होने पर उन्होंने मानवाधिकार आयोग में शिकायत की थी। इस पर आयोग ने डीएम से आख्या मांगी थी। इसके बावजूद वहां से कोई रिपोर्ट मिली न ही जिम्मेदार अधिकारी उपस्थित हुआ। तब आयोग ने डीएम के खिलाफ जमानती वारंट जारी किया है। इसमें कहा गया कि एसपी रामपुर 9 जून तक इस वारंट की तामील कराकर आयोग को सूचित करें। मामले की अगली सुनवाई 10 जून को होगी।
