- रिपोर्ट: जितेन्द्र ठाकुर
एक गरीब परिवार की होनहार बिटिया, जिसके हाथों में कल तक देश के लिए जीते मेडल थे, आज उसका परिवार उन्हीं मेडल्स को लेकर इंसाफ की भीख मांग रहा है।
उत्तर प्रदेश के मेरठ से आई यह खबर सिस्टम की संवेदनहीनता की जीती-जागती मिसाल है।
अनुष्का पिछले डेढ़ महीने से लापता थी। रोते-बिलखते परिजन चौकी से थाने और थाने से चौकी के चक्कर काटते रहे, लेकिन खाकी वर्दी का कोई फरिश्ता उनकी मदद को आगे नहीं आया। आखिरकार, तीन दिन पहले जब बेबस परिवार इन मेडल्स को लेकर मेरठ ADG और SSP के दरवाजे पर पहुंचा, तब जाकर सोए हुए सिस्टम को होश आया। पुलिस एक्टिव हुई और आरोपी श्याम धानुक को गिरफ्तार किया गया।
पर सबसे शर्मनाक बात यह है कि जिस पुलिस चौकी के पास अनुष्का का शव डेढ़ महीने तक नाले में सड़ता रहा, वहां की चप्पे-चप्पे की खबर रखने वाली पुलिस को इसकी भनक तक नहीं लगी। क्या इन चमकते मेडल्स की कीमत सिस्टम की नजरों में कुछ भी नहीं?
