संघर्ष से सफलता तक का सफर: सरोज खान ने बॉलीवुड को दिए कई यादगार डांस नंबर

  • रिपोर्ट: प्राची सिंह

मनोरंजन डेस्क। भारतीय सिनेमा की दिग्गज कोरियोग्राफर सरोज खान ने अपने हुनर, मेहनत और समर्पण के दम पर बॉलीवुड में ऐसी पहचान बनाई, जिसे आज भी सम्मान के साथ याद किया जाता है। एक साधारण परिवार से निकलकर उन्होंने न केवल कोरियोग्राफी की दुनिया में अपनी अलग जगह बनाई, बल्कि कई पीढ़ियों के कलाकारों को अपने निर्देशन में यादगार प्रस्तुतियां देने का अवसर भी दिया।

22 नवंबर 1948 को जन्मीं सरोज खान ने महज तीन वर्ष की उम्र में बाल कलाकार के रूप में फिल्मों में काम करना शुरू कर दिया था। आर्थिक परिस्थितियों के कारण कम उम्र में ही उन्होंने परिवार की जिम्मेदारियां संभाल लीं। बाल कलाकार के रूप में काम करने के बाद उन्होंने बैकग्राउंड डांसर के तौर पर फिल्म इंडस्ट्री में अपनी यात्रा जारी रखी। इसी दौरान उन्होंने नृत्य की बारीकियों को करीब से सीखा और अपनी प्रतिभा को निखारा।

सरोज खान को शुरुआती पहचान फिल्म ‘हावड़ा ब्रिज’ में बैकग्राउंड डांसर के रूप में मिली। वर्ष 1974 में फिल्म ‘गीता मेरा नाम’ से उन्होंने बतौर कोरियोग्राफर अपने करियर की शुरुआत की। इसके बाद उन्होंने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा और बॉलीवुड को कई यादगार डांस नंबर दिए।

उनके निर्देशन में फिल्म ‘मिस्टर इंडिया’ का ‘हवा हवाई’, ‘तेजाब’ का ‘एक दो तीन’, ‘बेटा’ का ‘धक-धक करने लगा’ और ‘देवदास’ का ‘डोला रे डोला’ जैसे गीत आज भी भारतीय सिनेमा के सबसे लोकप्रिय डांस गीतों में गिने जाते हैं। सरोज खान की कोरियोग्राफी की खासियत यह थी कि वह हर कलाकार की शैली और व्यक्तित्व के अनुसार नृत्य तैयार करती थीं। श्रीदेवी, माधुरी दीक्षित, रेखा और ऐश्वर्या राय जैसी अभिनेत्रियों के कई प्रतिष्ठित डांस नंबरों के पीछे उनकी रचनात्मक सोच रही।

करीब चार दशक लंबे करियर में सरोज खान ने सैकड़ों फिल्मों के लिए कोरियोग्राफी की और अपने काम के लिए कई राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार तथा फिल्मफेयर पुरस्कार भी प्राप्त किए। बाद के वर्षों में उन्होंने टेलीविजन पर भी अपनी मौजूदगी दर्ज कराई और ‘झलक दिखला जा’ तथा ‘नच बलिए’ जैसे रियलिटी शो में जज की भूमिका निभाई।

सरोज खान का निजी जीवन भी संघर्षों से भरा रहा। कम उम्र में उनकी पहली शादी सोहनलाल से हुई, जो बाद में टूट गई। इसके बाद उन्होंने सरदार रोशन खान से विवाह किया। जीवन की व्यक्तिगत चुनौतियों के बावजूद उन्होंने अपने पेशेवर सफर को कभी प्रभावित नहीं होने दिया।

3 जुलाई 2020 को उनके निधन से भारतीय फिल्म उद्योग ने एक महान कोरियोग्राफर को खो दिया। हालांकि, उनकी रची हुई नृत्य प्रस्तुतियां आज भी दर्शकों के दिलों में जीवित हैं और भारतीय सिनेमा के इतिहास में उनका योगदान हमेशा याद किया जाएगा।

About The Author

Leave A Reply

Your email address will not be published.