शिक्षिका की याचिका पर अदालत का बड़ा फैसला, सिगरा पुलिस की फाइनल रिपोर्ट निरस्त, 60 दिन में नए सिरे से विवेचना का आदेश

  • रिपोर्ट: सुकेश पांडेय

वाराणसी। मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट मनीष कुमार द्वितीय की अदालत ने बुधवार को एक शिक्षिका की याचिका पर सुनवाई करते हुए सिगरा थाना पुलिस द्वारा दाखिल की गई फाइनल रिपोर्ट (एफआर) को निरस्त कर दिया। अदालत ने इस मामले की नए सिरे से विवेचना कर 60 दिनों में रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है।

यह फाइनल रिपोर्ट 5 जून को अदालत में दाखिल की गई थी। शिक्षिका ने आरोप लगाया था कि सिगरा स्थित सनबीम डालिम्स स्कूल के डीन शुभोदीप डे और प्रधानाचार्या प्रतिभा द्विवेदी ने उन पर अनुचित कार्य करने का दबाव डाला। जब शिक्षिका ने इसका विरोध किया, तो उन्हें विद्यालय से निष्कासित कर दिया गया।

पीड़िता की शिकायत पर मामला दर्ज तो किया गया, लेकिन विवेचक द्वारा एकतरफा रिपोर्ट लगाई गई, जिससे न्याय की उम्मीद कर रही शिक्षिका ने अदालत का दरवाजा खटखटाया।

अदालत ने याचिका पर गंभीरता से विचार करते हुए स्पष्ट किया कि पुलिस की प्रारंभिक जांच पक्षपातपूर्ण और अधूरी प्रतीत होती है, इसलिए यह आवश्यक है कि मामले की निष्पक्ष जांच हो और सभी पक्षों को सुना जाए।

अब पुलिस को 60 दिनों के भीतर मामले की दोबारा विवेचना कर रिपोर्ट अदालत में पेश करनी होगी, जिससे सच्चाई सामने आ सके और पीड़िता को न्याय मिल सके।

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