नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने साफ कर दिया है कि आधार कार्ड को नागरिकता का प्रमाण नहीं माना जा सकता। अदालत ने बिहार में चल रही स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) की सुनवाई के दौरान यह टिप्पणी की और साथ ही आधार एक्ट 2016 की धारा 9 का जिक्र किया।
क्या कहा अदालत ने?
सर्वोच्च अदालत ने कहा कि आधार एक्ट की धारा 9 के तहत आधार केवल पहचान और निवास का प्रमाण है, लेकिन यह नागरिकता का सबूत नहीं है।
आधार कार्ड क्या है?
आधार भारत सरकार का एक 12 अंकों का यूनिक पहचान पत्र है, जिसे UIDAI द्वारा जारी किया जाता है। इसका उद्देश्य सरकारी योजनाओं और सेवाओं का लाभ सही व्यक्ति तक पहुँचाना है।
बिहार का मामला सुप्रीम कोर्ट तक क्यों पहुँचा?
बिहार में चुनाव आयोग ने आधार कार्ड को नागरिकता का सबूत मानने से इंकार कर दिया। इसके चलते 65 लाख लोगों के नाम मतदाता सूची से हटाए गए। इस पर आरजेडी (RJD) ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी।
आधार एक्ट की धारा 9 क्या कहती है?
आधार एक्ट 2016 की धारा 9 स्पष्ट करती है कि आधार नंबर या उसका प्रमाणीकरण किसी व्यक्ति को नागरिकता या निवास का अधिकार नहीं देता।
पुट्टस्वामी केस का संदर्भ
2018 में पुट्टस्वामी केस की सुनवाई के दौरान भी सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि आधार नागरिकता का सबूत नहीं है।
कौन से दस्तावेज मान्य हैं नागरिकता के लिए?
नागरिकता का सबूत: पासपोर्ट, जन्म प्रमाण पत्र, निवास प्रमाण पत्र
नागरिकता का सबूत नहीं: आधार, वोटर आईडी, पैन कार्ड, राशन कार्ड
सुप्रीम कोर्ट का यह आदेश न सिर्फ बिहार बल्कि पूरे देश के लिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह आधार और नागरिकता के बीच की कानूनी स्पष्टता स्थापित करता है।
