जिला सिरसा, जहां सरकार में भागीदारी का न होना पड़ रहा है भारी; घग्गर नदी मचा सकती है प्रलय 

ऐलनाबाद 27 जून ( एम पी भार्गव ) पंजाब तथा राजस्थान की सीमा से सटा हरियाणा राज्य का जिला मुख्यालय सिरसा सरकार में भागीदारी न होने के चलते स्वयं को बेबस समझने पर विवश होता नजर आने लगा है। इस जिले से संबंधित सांसद कांग्रेस की और कांग्रेस के तीन और दो इनैलो से विधायक हैं। इस जिले को सरकारी सहयोग न मिलने पर ग्राम पंचायतों ने अपने स्तर पर पैसा एकत्रित कर घग्गर नदी के कच्चे तटबंध मजबूत करने की कवायद शुरू कर दी है, ताकि पिछले वर्ष की तरह इस बार उनकी हजारों एकड़ जमीन तटबंधों के टूटने से बर्बाद न हो सके।

सरकार की अनदेखी और सहयोग न मिलने पर ग्राम मीरपुर सहित अन्य ग्रामों के ग्रामीणों ने तटबंधों को मजबूत करना शुरू कर दिया है ताकि मानसून में घग्गर का बहाव खतरे के निशान से ऊपर आकर कच्चे तटबंधों को तोड न सके। घग्गर के पानी के बढ़ते बहाव से ग्राम मुसाहिब वाला, पनिहारी,फरवाई खुर्द,नेजाडेला कलां, मीरपुर कालौनी, मीरपुर, अहमदपुर ढाणी, सुख-चैन,केलनियां,नानकपुर,माधोसिंधाना,खैरेकां,बनसुधार, भावदीन तथा ऐलनाबाद उप मंडल के दर्जनों ग्राम प्रभावित होते हैं।

ग्रामीणों ने स्वयं को संभावित इस आपदा से निपटने के लिए प्रति एकड़ हिसाब से पैसा एकत्रित कर तटबंधों को मजबूत करने के लिए जेसीबी मशीन और ट्रैक्टर ट्राली की मदद से खेतों से मिट्टी उठाकर तटबंधों पर लगानी शुरू कर दी है। पिछले वर्ष आई इस आपदा से हजारों एकड़ भूमि जलमग्न हो गईं थीं और ग्रामीणों को भारी क्षति झेलनी पड़ी थी।

सरकार ने प्रभावित ग्रामीणों को वर्ष 2023 से हुई क्षतिपूर्ति का मुआवजा देने को कहा था, जिसपर अभी तक कोई अमल नहीं हुआ और न ही बीते वर्ष हुई क्षति पर कोई मुआवजा मिला है। सरकारी सहयोग न मिलने के बावजूद ग्रामीणों ने निजी स्तर पर पैसा एकत्रित कर तटबंधों को मजबूत करना शुरू कर दिया है क्योंकि सरकार में भागीदारी न होने का खमियाजा भुगतने के अतिरिक्त कोई राह भी नज़र नहीं आती दिखाई दे रही।

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