Raza Library Exhibition: मंडलायुक्त संगीता सिंह ने किया कला प्रदर्शनी का उद्घाटन, चित्रकार यासीन ख़ान की कलाकृतियां बनीं आकर्षण
रामपुर से पेरिस तक कला और कविता का सफर, रज़ा लाइब्रेरी में सजी विशेष प्रदर्शनी
- रिपोर्ट: शाहबाज़ खां
Rampur Raza Library Exhibition: रामपुर रज़ा लाइब्रेरी में आज ‘द वर्ल्ड इज़ पोएट्री’ (The World Is Poetry) शीर्षक से एक विशेष प्रदर्शनी का उद्घाटन मुरादाबाद मंडल की मंडलायुक्त संगीता सिंह, आई.ए.एस.के करकमलों द्वारा किया गया। यह प्रदर्शनी 15 अक्टूबर से 28 अक्टूबर, 2026 तक लाइब्रेरी के दरबार हॉल में आमजन, साहित्यप्रेमियों, कला के विद्यार्थियों, शोधार्थियों और संस्कृति में रुचि रखने वाले लोगों के अवलोकनार्थ आयोजित की जा रही है। प्रदर्शनी की संकल्पना इस विचार पर आधारित है कि कविता केवल शब्दों और पंक्तियों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह जीवन, प्रकृति, भावनाओं, कल्पनाओं और मानवीय अनुभवों को समझने का एक व्यापक माध्यम है। संसार की विविधता, मनुष्य के अंतर्मन की अनुभूतियाँ और जीवन के सूक्ष्म पक्ष कला एवं साहित्य के माध्यम से अभिव्यक्त होते हैं। इसी विचार को केंद्र में रखकर इस प्रदर्शनी का आयोजन किया गया है।
प्रदर्शनी में मिर्ज़ा ग़ालिब, रवीन्द्रनाथ टैगोर, पियर पाओलो पासोलिनी और फर्नांडो पेसोआ जैसे प्रतिष्ठित साहित्यिक व्यक्तित्वों के विचारों एवं उद्धरणों को स्थान दिया गया है। इनके माध्यम से साहित्य की व्यापकता, जीवन के प्रति दृष्टिकोण और मानवीय संवेदनाओं की अभिव्यक्ति को रेखांकित किया गया है। प्रदर्शनी का उद्देश्य दर्शकों को यह अनुभव कराना है कि कविता केवल पढ़ने की वस्तु नहीं, बल्कि जीवन और संसार को एक नए दृष्टिकोण से देखने की संवेदनशील प्रक्रिया भी है।
Raza Library Exhibition: रामपुर से पेरिस तक-शायरी, कला और एहसासों का सफ़र
इस प्रदर्शनी के केंद्र में भारतीय मूल के चित्रकार यासीन ख़ान की विशिष्ट कलात्मक दृष्टि है। चित्रकला, अभिनय और फ़्रांसीसी कविता के क्षेत्र में अपनी पहचान बनाने वाले यासीन ख़ान का जन्म 20 अगस्त, 1943 को उत्तर प्रदेश के रामपुर में मस्जिद पीलू, राजद्वारा में हुआ था। रामपुर से मुंबई, इटली और अंततः पेरिस तक पहुँची उनकी कलात्मक यात्रा विभिन्न संस्कृतियों, साहित्यिक परंपराओं और रचनात्मक अभिव्यक्तियों के संगम की प्रेरक कहानी है। मुंबई में अपने शुरुआती दिनों के दौरान उन्होंने उर्दू ग़ज़लें प्रकाशित कीं और अनेक पुरस्कार प्राप्त किए। वर्ष 1961 में उनकी मुलाक़ात प्रसिद्ध इतालवी फ़िल्मकार एवं कवि पियर पाओलो पासोलिनी से हुई। इस मुलाक़ात ने उनके जीवन और कलात्मक दृष्टिकोण को नई दिशा प्रदान की। इसके बाद एल्सा मोरांते और अल्बेर्तो मोराविया जैसे प्रतिष्ठित साहित्यकारों से उनका परिचय हुआ, जिसने उनकी रचनात्मक संवेदनाओं को और समृद्ध किया। वर्ष 1973 में पेरिस में रहते हुए यासीन ख़ान ने चित्रकला के माध्यम से कविता की एक अनूठी दृश्यात्मक भाषा विकसित की। उनके चित्रों में शब्द, रंग, रेखाएँ और अलंकरण मिलकर जीवन, प्रेम और अस्तित्व के विविध भावों को अभिव्यक्त करते हैं। उनकी कला में भारतीय साहित्यिक परंपरा, विशेषकर मिर्ज़ा ग़ालिब और रवीन्द्रनाथ टैगोर की संवेदनाओं के साथ-साथ यूरोपीय साहित्य और कला की प्रेरणाएँ भी दिखाई देती हैं।

Raza Library Exhibition: भारतीय और यूरोपीय सांस्कृतिक के मेल की विशिष्ट गाथा
यासीन ख़ान की रचनात्मकता की विशिष्ट विशेषता यह है कि उनके लिए चित्रकला केवल रंगों का संयोजन नहीं, बल्कि कविता की दृश्यात्मक अभिव्यक्ति है। उनकी कलाकृतियों में शब्द चित्रों का रूप लेते हैं और चित्र कविता की अनुभूति कराते हैं। इस प्रकार उनकी कला दर्शकों को साहित्य और दृश्य कला के बीच स्थापित उस रचनात्मक संवाद से परिचित कराती है, जिसमें भावनाएँ और विचार विभिन्न कलात्मक माध्यमों के माध्यम से अभिव्यक्त होते हैं। रामपुर से पेरिस तक का उनका सफ़र केवल भौगोलिक यात्रा नहीं, बल्कि भारतीय और यूरोपीय सांस्कृतिक परंपराओं, साहित्यिक विचारों और कलात्मक संवेदनाओं के मेल की एक विशिष्ट गाथा है। ‘द वर्ल्ड इज़ पोएट्री’ प्रदर्शनी इसी कलात्मक दृष्टिकोण को दर्शकों तक पहुँचाने का प्रयास है।
इस अवसर पर मुख्य अतिथि संगीता सिंह (आई.ए.एस.), मंडलायुक्त, मुरादाबाद मंडल ने रामपुर रज़ा पुस्तकालय की ऐतिहासिक और वैश्विक महत्ता को रेखांकित करते हुए इसे दुनिया के सामने एक ‘लिविंग कल्चरल इंस्टीट्यूशन’ के रूप में प्रस्तुत करने का आह्वान किया। उन्होंने पुस्तकालय और रामपुर के समग्र विकास के लिए मासिक कला विमर्श, वार्षिक रज़ा आर्ट फेस्टिवल, ‘ट्रेज़र्स ऑफ रज़ा’ श्रृंखला, शाम-ए-रामपुर, हेरिटेज ट्रेल्स और ‘रामपुर कन्वर्सेशन्स’ पॉडकास्ट जैसे अभिनव सुझाव दिए। मंडलायुक्त ने स्थानीय अर्थव्यवस्था को गति देने के लिए रामपुर डेवलपमेंट अथॉरिटी के सहयोग से ‘रज़ा लाइब्रेरी स्ट्रीट’ बनाने और संस्थागत साझेदारी पर ज़ोर दिया। साथ ही, उन्होंने अपनी पुस्तकों ‘वॉकिंग विद विंग्स एंड ए कैमरा’ और ‘फायर इन द सेमिनल ट्री’ को पुस्तकालय के संग्रह में शामिल करने के लिए आभार व्यक्त किया।
Raza Library Exhibition: युवाओं की रचनात्मकता को नई दिशा
संगीता सिंह ने चित्रकार यासीन ख़ान की प्रदर्शनी ‘द वर्ल्ड इज़ पोएट्री’ की सराहना करते हुए कहा कि कला और कविता मानवीय अनुभूतियों को अभिव्यक्त करने के सशक्त माध्यम हैं, जो समाज की सांस्कृतिक चेतना और युवाओं की रचनात्मकता को नई दिशा देते हैं। कला और साहित्य किसी भी समाज की संवेदनशीलता, रचनात्मकता और सांस्कृतिक चेतना के महत्वपूर्ण आधार हैं। कविता हमें जीवन और संसार को एक अलग दृष्टि से देखने की प्रेरणा देती है। ‘द वर्ल्ड इज़ पोएट्री’ जैसी प्रदर्शनी साहित्य और कला को आमजन के निकट लाने का एक सराहनीय प्रयास है। इस प्रकार के आयोजन विद्यार्थियों, युवाओं, शोधार्थियों और साहित्यप्रेमियों को रचनात्मक अभिव्यक्ति के नए आयामों से परिचित कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उन्होंने कहा कि चित्रकार यासीन ख़ान जी ने अपनी रचनात्मक परिकल्पना के माध्यम से कविता तथा दृश्य कला के बीच संबंध को रेखांकित किया है। कला और कविता दोनों ही मानवीय अनुभूतियों को अभिव्यक्त करने के प्रभावशाली माध्यम हैं। जहाँ कविता शब्दों के माध्यम से भावनाओं को स्वर देती है, वहीं दृश्य कला रंगों, आकृतियों और कल्पना के माध्यम से संवेदनाओं को सामने लाती है।
Raza Library Exhibition: सांस्कृतिक संवाद की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल
इस अवसर पर जिलाधिकारी अजय कुमार द्विवेदी (आई.ए.एस.) ने कहा कि यह हमारे लिए अत्यंत गर्व का विषय है कि ऐसा विश्व स्तरीय पुस्तकालय और प्रतिभावान कलाकार हमारे रामपुर में मौजूद हैं। उन्होंने इस शानदार प्रदर्शनी के सफल आयोजन के लिए रज़ा लाइब्रेरी के पूरे स्टाफ का विशेष धन्यवाद किया। जिलाधिकारी ने प्रदर्शनी के गहरे संदेश को रेखांकित करते हुए कहा कि इसमें सम्मिलित साहित्यिक उद्धरण इस बात की ओर स्पष्ट संकेत करते हैं कि भाषा, देश और संस्कृति की सीमाओं से परे भी मानवीय भावनाएँ हमेशा एक-दूसरे से जुड़ी होती हैं। उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि ‘द वर्ल्ड इज़ पोएट्री’ प्रदर्शनी केवल साहित्यिक उद्धरणों का संकलन मात्र नहीं है, बल्कि यह विचार, अनुभूति और कलात्मक अभिव्यक्ति के बीच के गहरे संबंध को समझने का एक अनूठा प्रयास है। इसके माध्यम से रामपुर रज़ा लाइब्रेरी एवं म्यूज़ियम ने साहित्य और कला को जनसामान्य से जोड़ने तथा सांस्कृतिक संवाद को प्रोत्साहित करने की दिशा में एक बेहद महत्वपूर्ण पहल प्रस्तुत की है।
इस समारोह में मुख्य समन्वयक एवं वरिष्ठ तकनीकी रेस्टोरर अरुण कुमार सक्सेना ने मुरादाबाद मंडल की मंडलायुक्त संगीता सिंह (आई.ए.एस.) और जिलाधिकारी अजय कुमार द्विवेदी (आई.ए.एस.) का हार्दिक स्वागत एवं अभिनंदन किया। उन्होंने रामपुर में जन्मे और मुंबई, इटली व पेरिस तक चित्रकला, अभिनय तथा फ्रांसीसी कविता में अंतरराष्ट्रीय पहचान बनाने वाले प्रख्यात चित्रकार यासीन ख़ान के योगदान को रेखांकित करते हुए उनके चित्रों की उपस्थिति को शहर के लिए गर्व का विषय बताया गया। सक्सेना ने संस्कृति मंत्रालय (भारत सरकार) के संयुक्त सचिव एवं पुस्तकालय के निदेशक इन्द्रजीत सिंह का विशेष आभार व्यक्त किया, जिनके तत्काल प्रोत्साहन और स्वीकृति से इस वैश्विक प्रदर्शनी का विचार साकार हो सका।
कहा कि,
“रामपुर रज़ा लाइब्रेरी एवं म्यूज़ियम का उद्देश्य अपनी समृद्ध ऐतिहासिक धरोहर के संरक्षण के साथ-साथ ज्ञान, साहित्य, कला और संस्कृति को जनसामान्य तक पहुँचाना भी है। ‘द वर्ल्ड इज़ पोएट्री’ जैसी प्रदर्शनी इन उद्देश्यों को आगे बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण है। हमारा प्रयास है कि लाइब्रेरी केवल ऐतिहासिक संग्रहों के अध्ययन का केंद्र ही न रहे, बल्कि कला, साहित्य और रचनात्मक विचारों के आदान-प्रदान का भी प्रमुख मंच बने। हमें विश्वास है कि यह प्रदर्शनी दर्शकों को साहित्य और कला के प्रति नई रुचि विकसित करने के लिए प्रेरित करेगी।”
इस गरिमामयी अवसर पर विद्वतजन, साहित्यप्रेमी, मीडिया प्रतिनिधि और सी.आई.एस.एफ. (CISF) परिवार के सदस्य उपस्थित रहे। कहा कि लाइब्रेरी के दरबार हॉल में आयोजित यह विशेष प्रदर्शनी 15 अक्टूबर से 28 अक्टूबर 2026 तक प्रदर्शित रहेगी। लाइब्रेरी की ओर से साहित्यप्रेमियों, विद्यार्थियों, शोधार्थियों, कलाकारों और आमजन को इस प्रदर्शनी का अवलोकन करने तथा कविता एवं कला की दुनिया से जुड़ने के लिए आमंत्रित किया जाता है। इस अवसर पर आयोजित कार्यक्रम का सफल संचालन शाज़िया हसन द्वारा किया गया।
