ऐलनाबाद: भाई-बहन के पवित्र प्रेम, स्नेह और विश्वास का प्रतीक रक्षाबंधन का पर्व इस वर्ष 28 अगस्त 2026, शुक्रवार को श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया जाएगा। रक्षाबंधन को लेकर जहां बाजारों में तैयारियां शुरू हो गई हैं, वहीं ज्योतिषीय दृष्टि से भी इस बार का रक्षाबंधन विशेष माना जा रहा है।
ज्योतिषी के अनुसार इस दिन सुकर्मा योग और शतभिषा नक्षत्र का विशेष महासंयोग बन रहा है। साथ ही इस दिन भद्रा का साया भी नहीं रहेगा, जिसके कारण रक्षाबंधन पर राखी बांधने के लिए शुभ समय को लेकर श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह है।
ज्योतिषाचार्य कैलाश शर्मा गिद्दड़बाहा ने बताया कि इस वर्ष रक्षाबंधन पर बनने वाला सुकर्मा योग धार्मिक एवं ज्योतिषीय दृष्टि से विशेष महत्व रखता है। सुकर्मा योग को शुभ कार्यों के लिए अनुकूल माना जाता है। वहीं शतभिषा नक्षत्र भी इस दिन की धार्मिक महत्ता को बढ़ा रहा है। उन्होंने कहा कि रक्षाबंधन जैसे पवित्र पर्व पर शुभ योग और अनुकूल नक्षत्र का होना भाई-बहन के रिश्ते के लिए मंगलकारी माना जाता है।
कैलाश शर्मा गिद्दड़बाहा के अनुसार 28 अगस्त को राखी बांधने का शुभ मुहूर्त सुबह 5:57 बजे से सुबह 9:48 बजे तक रहेगा। यह अवधि लगभग 3 घंटे 51 मिनट की होगी। इस दौरान बहनें विधि-विधान के साथ अपने भाइयों की कलाई पर राखी बांध सकती हैं।
उन्होंने बताया कि पूर्णिमा तिथि भी सुबह 9:48 बजे तक रहेगी, इसलिए पूर्णिमा तिथि के दौरान रक्षासूत्र बांधना विशेष शुभ माना जाएगा।
उन्होंने कहा कि इस बार रक्षाबंधन पर भद्रा का साया नहीं रहेगा। बहनों को सलाह दी गई है कि वे सुबह के शुभ मुहूर्त में ही भाई की कलाई पर राखी बांधने का प्रयास करें।
ज्योतिषी के अनुसार इस दिन राहुकाल सुबह 10:46 बजे से दोपहर 12:22 बजे तक रहेगा। बताया कि राहुकाल में शुभ कार्य करने से सामान्यतः बचने की परंपरा है। इसलिए यदि राखी बांधने का कार्य सुबह के शुभ मुहूर्त में कर लिया जाए तो यह अधिक उत्तम रहेगा।
