गुस्ताखी माफ हरियाणा: पवन कुमार बंसल
रेखा शर्मा द्वारा भजन लाल के अपमान से पहले कुलदीप बिश्नोई अपने पिता भजन लाल का राजनीतिक श्राद्ध करने वाले भूपेंद्र हुड्डा को आदमपुर के देशी घी का हलवा खिला चुके हैं
हरियाणा की राजनीति में एक बार फिर बयानबाजी और सियासी कटाक्ष चर्चा का विषय बन गए हैं। भाजपा की संसद सदस्य रेखा शर्मा द्वारा खुले मंच से भजन लाल को लेकर की गई टिप्पणी ने सियासी माहौल को गरमा दिया है। इस पर भाजपा नेता कुलदीप बिश्नोई की प्रतिक्रिया भी चर्चा में है। उन्होंने शायराना अंदाज़ में कहा—
“हम समंदर हैं, हमें खामोश रहने दो,
जरा मचल गए तो शहर ले डूबेंगे।”
हालांकि, इस बयान पर भी सवाल उठे कि शहर का इसमें क्या दोष है, उसे क्यों निशाना बनाया जाए। रेखा शर्मा के बयान को लेकर भी राजनीतिक गलियारों में तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। इससे पहले मनोहर लाल भी भजन लाल को लेकर विवादित टिप्पणी कर चुके हैं।
इसी बीच हरियाणा की राजनीति में पुराने घटनाक्रम भी फिर से चर्चा में हैं। कुलदीप बिश्नोई द्वारा अपने पिता और पूर्व मुख्यमंत्री भजन लाल के राजनीतिक विरोधी भूपिंदर सिंह हुड्डा को देशी घी का हलवा खिलाने की घटना को लेकर सियासी तंज कसे जा रहे हैं। इसे कई लोग हरियाणा की अवसरवादी राजनीति का उदाहरण बता रहे हैं।
हिंदू परंपरा में जहां पूर्वजों की आत्मा की शांति के लिए श्राद्ध किया जाता है, वहीं इस घटनाक्रम को लेकर यह सवाल उठाया जा रहा है कि राजनीतिक विरोध और व्यक्तिगत संबंधों के बीच की रेखा कितनी धुंधली हो चुकी है।
पुराने राजनीतिक घटनाक्रमों को याद करते हुए यह भी कहा जा रहा है कि एक समय पार्टी विधायकों का बहुमत भजन लाल को मुख्यमंत्री बनाना चाहता था, लेकिन परिस्थितियां कुछ ऐसी बनीं कि भूपिंदर सिंह हुड्डा मुख्यमंत्री बने और भजन लाल को कांग्रेस छोड़नी पड़ी।
इस पूरे घटनाक्रम में कुलदीप शर्मा का नाम भी चर्चा में आता है, जिन्हें उस समय प्रदेश कांग्रेस में महत्वपूर्ण भूमिका दी गई थी। आज फिर से इन सभी मुद्दों को लेकर सियासी बयानबाजी तेज हो गई है।
कुल मिलाकर, हरियाणा की राजनीति में बयान, तंज और पुराने समीकरण एक बार फिर सुर्खियों में हैं, जो यह दर्शाते हैं कि यहां की राजनीति में व्यक्तिगत रिश्तों और राजनीतिक रणनीतियों का मेल कितना जटिल और बहुआयामी है।
