ऐतिहासिक कैलाश मंदिर से लगा तालाब बना कूड़ाघर, सांस्कृतिक धरोहर पर मंडराया संकट

एटा:- नगर पालिका पर गंभीर आरोप, संरक्षण और जांच की उठी मांग शहर एटा की धार्मिक, सांस्कृतिक और ऐतिहासिक पहचान से जुड़े प्राचीन कैलाश मंदिर के निकट स्थित ऐतिहासिक तालाब आज उपेक्षा और प्रदूषण का शिकार होता दिखाई दे रहा है। स्थानीय नागरिकों ने आरोप लगाया है कि तालाब क्षेत्र में लगातार कूड़ा-करकट डलवाया जा रहा है, जिससे यह प्राचीन जलाशय धीरे-धीरे कूड़ाघर में तब्दील होता जा रहा है।

मामले को लेकर क्षेत्रवासियों में भारी रोष व्याप्त है और प्रशासन से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की जा रही है। स्थानीय लोगों द्वारा उपलब्ध कराए गए फोटो में तालाब के किनारे बड़े पैमाने पर कूड़ा फैला हुआ स्पष्ट दिखाई दे रहा है। नागरिकों का आरोप है कि नगर पालिका के सफाई कर्मियों द्वारा यहां नियमित रूप से कूड़ा डलवाया जा रहा है, जिससे न केवल तालाब का अस्तित्व संकट में पड़ रहा है बल्कि आसपास का वातावरण भी दूषित हो रहा है।

क्षेत्रवासियों का कहना है कि कैलाश मंदिर से लगा यह तालाब वर्षों पुराना धार्मिक एवं ऐतिहासिक महत्व का जल स्रोत रहा है। कभी यह तालाब स्थानीय लोगों की आस्था, जल संरक्षण और पर्यावरणीय संतुलन का केंद्र माना जाता था, लेकिन वर्तमान में इसकी स्थिति अत्यंत चिंताजनक हो गई है। तालाब में बढ़ते कूड़े के ढेर और जलभराव क्षेत्र में उगी घनी झाड़ियों ने इसके मूल स्वरूप को लगभग समाप्त कर दिया है।
स्थानीय नागरिकों ने चेतावनी दी है कि यदि समय रहते इस ऐतिहासिक जलाशय को बचाने के लिए प्रभावी कदम नहीं उठाए गए तो आने वाली पीढ़ियां अपनी इस महत्वपूर्ण सांस्कृतिक धरोहर से वंचित हो जाएंगी।

लोगों का कहना है कि एक ओर सरकार जल संरक्षण, अमृत सरोवर योजना और स्वच्छ भारत मिशन के माध्यम से जलाशयों के संरक्षण पर करोड़ों रुपये खर्च कर रही है, वहीं दूसरी ओर ऐतिहासिक तालाबों की इस प्रकार की उपेक्षा कई सवाल खड़े करती है।

नागरिकों ने जिलाधिकारी, नगर पालिका प्रशासन, सिंचाई विभाग एवं संबंधित अधिकारियों से मांग की है कि मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए, तालाब में कूड़ा डालने की गतिविधियों पर तत्काल रोक लगाई जाए, दोषियों के विरुद्ध कार्रवाई की जाए तथा जलाशय का सौंदर्यीकरण एवं पुनर्जीवन कराया जाए।

नागरिकों की प्रमुख मांगें

  • ऐतिहासिक तालाब में कूड़ा डालने पर तत्काल रोक लगाई जाए।
  • मामले की उच्चस्तरीय जांच कराई जाए।
  • तालाब की सफाई और पुनर्जीवन कार्य शुरू किया जाए।
  • जलाशय को अतिक्रमण एवं प्रदूषण से मुक्त कराया जाए।
  • कैलाश मंदिर परिसर की ऐतिहासिक और धार्मिक गरिमा को संरक्षित किया जाए।

क्षेत्रवासियों का कहना है कि यह केवल एक तालाब नहीं, बल्कि शहर की ऐतिहासिक विरासत और पर्यावरणीय धरोहर है, जिसे बचाना प्रशासन और समाज दोनों की जिम्मेदारी है।

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