‘पटरंगम 2026’ के दूसरे दिन शिक्षा और व्यवस्था पर केंद्रित नाटकों ने दर्शकों को किया विचारमग्न

पटना: कला एवं संस्कृति विभाग, बिहार सरकार के सौजन्य से तथा विश्वा, पटना (वाईटल इन्वेशन औफ सोशल हारमोनी विथ आर्ट) द्वारा आयोजित तीन दिवसीय लोक नाट्य महोत्सव “पटरंगम 2026 – पटना रंग महोत्सव” के दूसरे दिन प्रेमचंद रंगशाला, राजेन्द्र नगर, पटना में नुक्कड़ नाटक एवं रंगमंचीय प्रस्तुतियों के माध्यम से शिक्षा व्यवस्था, सामाजिक परिवर्तन और प्रशासनिक व्यवस्था जैसे समकालीन विषयों को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया गया। बड़ी संख्या में रंगकर्मियों, साहित्यकारों, कला-प्रेमियों एवं दर्शकों ने प्रस्तुतियों का आनंद लिया।

शाम 5:30 बजे आयोजित नुक्कड़ नाटक सत्र में संस्था लोक बाग़ प्रस्तुति, पटना द्वारा “सिक्योरिटी गार्ड की बहाली” का मंचन किया गया। नाटक के लेखक एवं निर्देशक कुमार उदय सिंह हैं तथा कलाकार पप्पू ठाकुर एवं कुमार उदय सिंह हैं| यह प्रस्तुति सरकारी व्यवस्था और भर्ती प्रक्रिया पर आधारित एक सशक्त हास्य-व्यंग्य थी, जिसमें प्रशासनिक विसंगतियों और आम नागरिक की समस्याओं को तीखे लेकिन मनोरंजक अंदाज़ में मंचित किया गया। कलाकारों ने व्यंग्य और हास्य के माध्यम से व्यवस्था की विडंबनाओं को उजागर करते हुए दर्शकों को हँसने के साथ-साथ सोचने पर भी मजबूर किया।

On the second day of 'Patrangam 2026', plays focusing on education and the social order left the audience deep in thought.

इसके उपरांत शाम 6:30 बजे सुगम साहित्य संचार समिति द्वारा मृत्युंजय शर्मा लिखित नाटक “मास्टरनी साहिबा” का मंचन किया गया। नाटक का निर्देशन युवा रंगकर्मी सरिता कुमारी ने किया। यह प्रस्तुति बिहार की शिक्षा व्यवस्था, विशेषकर महिला शिक्षकों की नियुक्ति के बाद ग्रामीण विद्यालयों और समाज में आए सकारात्मक बदलावों को अत्यंत संवेदनशील और प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत करती है।

On the second day of 'Patrangam 2026', plays focusing on education and the social order left the audience deep in thought.

नाटक की कहानी कंजौरी नामक एक अति पिछड़े गाँव के विद्यालय की पृष्ठभूमि पर आधारित है, जहाँ एकमात्र शिक्षक पूरे विद्यालय की जिम्मेदारी संभाल रहा होता है। नई शिक्षिका ‘मास्टरनी साहिबा’ के आगमन के बाद विद्यालय, बच्चों और पूरे गाँव की सोच में धीरे-धीरे सकारात्मक परिवर्तन आने लगता है। सामाजिक चुनौतियों, महिला शिक्षिका के संघर्ष, शिक्षा के महत्व और ग्रामीण समाज में बदलाव की इस यात्रा को नाटक ने अत्यंत मार्मिकता के साथ मंच पर प्रस्तुत किया।

On the second day of 'Patrangam 2026', plays focusing on education and the social order left the audience deep in thought.

अंततः शिक्षा की शक्ति से न केवल विद्यालय की तस्वीर बदलती है, बल्कि समाज की सोच में भी सकारात्मक परिवर्तन दिखाई देता है।
मंच पर रजनी कुमारी, प्रतीक्षा, टीपू पाण्डेय एवं मृत्युंजय शर्मा ने अपने सशक्त अभिनय से दर्शकों की भरपूर सराहना अर्जित की। वहीं नेपथ्य में धनंजय कुमार (मंच व्यवस्था), सुनील कुमार (मंच निर्माण), नीरज कुमार (प्रस्तुति नियंत्रण), सृष्टि शर्मा (रूप सज्जा), भूमि शर्मा (पात्र सामग्री), एकता भारती (संगीत), रौशन कुमार (प्रकाश व्यवस्था), कमलजीत कुमार (प्रस्तुति प्रभारी), कौशिक कुमार (मंच सामग्री) तथा श्रेया शर्मा (सहायक निर्देशक) ने प्रस्तुति को प्रभावशाली बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

निर्देशक सरिता कुमारी इतिहास विषय में स्नातक एवं पत्रकारिता एवं जनसंचार में स्नातकोत्तर शिक्षित प्रशिक्षित रंगकर्मी हैं। बचपन से ही रंगमंच, आकाशवाणी और दूरदर्शन से जुड़ी रही सरिता कुमारी ने अपने निर्देशन में नाटक को संवेदनशीलता, सहजता और प्रभावी रंगभाषा के साथ प्रस्तुत कर दर्शकों की खूब सराहना प्राप्त की।

कार्यक्रम के अंत में आयोजक राजेश राजा ने बताया कि 25 जुलाई को महोत्सव के अंतिम दिन भी बिहार के विभिन्न रंग समूहों द्वारा सामाजिक सरोकारों से जुड़े नुक्कड़ एवं मंच नाटकों की प्रस्तुतियाँ की जाएँगी। महोत्सव के दूसरे दिन भी प्रेमचंद रंगशाला में दर्शकों की उत्साहपूर्ण उपस्थिति ने यह सिद्ध किया कि बिहार की रंगपरंपरा आज भी समाज में संवाद और जागरूकता का सशक्त माध्यम बनी हुई है।

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