सरकार का बड़ा कदम दिव्यांगजनों को मिलेगी मुफ्त कानूनी सहायता और डिजिटल न्याय, केंद्रीय मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने संसद में दी जानकारी
- रिपोर्टर: प्रमोद यादव
नई दिल्ली: केंद्रीय विधि एवं न्याय मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने लोकसभा में एक लिखित उत्तर में बताया कि केंद्र सरकार देश के दिव्यांगजनों को सस्ती, गुणवत्तापूर्ण और त्वरित कानूनी सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है। इसके लिए डिजिटल न्याय प्रणाली और बुनियादी ढांचे को लगातार मजबूत किया जा रहा है।
मुफ्त कानूनी सहायता का अधिकार:
कानूनी सेवा प्राधिकरण (एलएसए) अधिनियम 1987 के तहत देश के सभी दिव्यांगजन मुफ्त और सक्षम कानूनी सहायता पाने के हकदार हैं। सरकार ने मानसिक और बौद्धिक रूप से दिव्यांग लोगों के लिए “एनएलएसएएसडी” नामक एक विशेष योजना भी लागू की है जिसके तहत उनके घरों, अस्पतालों और पुनर्वास केंद्रों तक कानूनी मदद पहुंचाई जा रही है।
रिकॉर्ड संख्या में लोगों को मिली मदद:
पिछले तीन सालों में मुफ्त कानूनी सेवाएं पाने वाले दिव्यांग व्यक्तियों की संख्या में भारी बढ़ोतरी हुई है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार:
वर्ष 2023-24 में: 11,591 दिव्यांगों को मदद मिली
वर्ष 2024-25 में: 8,313 दिव्यांगों को मदद मिली
वर्ष 2025-26 में: 15,280 दिव्यांगों को मदद मिली
ई-कोर्ट्स और डिजिटल न्याय के लिए करोड़ों का बजट:
अदालतों को दिव्यांग-अनुकूल बनाने और डिजिटल बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के लिए ई-कोर्ट्स मिशन मोड परियोजना के तीसरे चरण के तहत कई अहम कदम उठाए जा रहे हैं। दिव्यांगजनों को उन्नत सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी (आईसीटी) सुविधाएं देने के लिए 27.54 करोड़ रुपये और सरकारी वेबसाइटों को दिव्यांग-अनुकूल बनाने के लिए 6.35 करोड़ रुपये का बजट आवंटित किया गया है। अब आंशिक और पूर्ण रूप से दृष्टिबाधित नागरिक भी आसानी से अदालती सामग्री देख सकेंगे।अदालतों में बुनियादी सुविधाओं का विकास:जिला और अधीनस्थ अदालतों के भवनों, न्यायिक अधिकारियों के आवासों, वकीलों के लिए आवास, डिजिटल कंप्यूटर कक्ष और शौचालयों को दिव्यांगों की जरूरत के अनुरूप विशेष डिजाइन में तैयार करने का निर्देश दिया गया है।
