Maharishi Valmiki Jayanti: सिरसा में महर्षि वाल्मीकि जयंती पर जिला स्तरीय कार्यक्रम, सामाजिक समरसता और भाईचारे का दिया संदेश
Sirsa Maharishi Valmiki Jayanti (एम पी भार्गव): संत महापुरुष सम्मान एवं विचार प्रसार योजना के तहत रविवार को सिरसा के पंचायत भवन में महर्षि वाल्मीकि जयंती पर जिला स्तरीय कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में वक्ताओं ने महर्षि वाल्मीकि के जीवन, उनकी शिक्षाओं और रामायण में निहित आदर्शों पर प्रकाश डालते हुए सामाजिक समरसता, आपसी भाईचारे, नैतिक मूल्यों और कर्तव्य पालन का संदेश दिया।
कार्यक्रम में नगर परिषद सिरसा के चेयरमैन शांति स्वरूप मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। भाजपा जिला अध्यक्ष यतिंद्र सिंह एडवोकेट और मुख्यमंत्री के पूर्व राजनीतिक सलाहकार जगदीश चोपड़ा विशिष्ट अतिथि रहे। कार्यक्रम की अध्यक्षता नगराधीश अजय सिंह ने की। इस अवसर पर भाजपा नेता अंग्रेज सिंह और हिंदी प्रवक्ता चिमन भारतीय भी मौजूद रहे।
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Maharishi Valmiki Jayanti: महर्षि वाल्मीकि की शिक्षाएं आज भी प्रासंगिक
नगर परिषद चेयरमैन शांति स्वरूप ने कहा कि महर्षि वाल्मीकि का जीवन और उनकी रचनाएं समाज को ज्ञान, सद्भाव और मानवता का मार्ग दिखाती हैं। उनकी शिक्षाएं आज भी प्रासंगिक हैं और समाज को सही दिशा प्रदान करती हैं।

उन्होंने कहा कि महर्षि वाल्मीकि के विचारों का अधिक से अधिक प्रचार-प्रसार करने और लोगों को उनकी शिक्षाओं के प्रति जागरूक बनाने की आवश्यकता है। सामाजिक समरसता पर जोर देते हुए उन्होंने कहा कि समाज में एकता और सद्भाव बनाए रखना सभी की जिम्मेदारी है।
शांति स्वरूप ने कहा कि महर्षि वाल्मीकि की शिक्षाएं किसी एक वर्ग तक सीमित नहीं हैं, बल्कि संपूर्ण मानव समाज के लिए प्रेरणादायक हैं। उन्होंने लोगों से आपसी मतभेद दूर कर भाईचारे को मजबूत बनाने का आह्वान किया।
Maharishi Valmiki Jayanti: रामायण में जीवन मूल्यों और कर्तव्य पालन की सीख
मुख्यमंत्री के पूर्व राजनीतिक सलाहकार जगदीश चोपड़ा ने कहा कि किसी देश और समाज की महानता केवल ऊंची इमारतों, चौड़ी सड़कों और औद्योगिक विकास से नहीं, बल्कि नागरिकों के संस्कारों, नैतिक मूल्यों और आचरण से भी तय होती है।

उन्होंने कहा कि महर्षि वाल्मीकि द्वारा रचित रामायण मानव जीवन के आदर्शों को समझने का महत्वपूर्ण माध्यम है। इसमें माता-पिता के प्रति सम्मान, भाईचारे, गुरु-शिष्य परंपरा और कर्तव्य पालन की महत्वपूर्ण शिक्षाएं मिलती हैं।
भगवान श्रीराम और लक्ष्मण के प्रसंग का उल्लेख करते हुए जगदीश चोपड़ा ने मातृभूमि के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि महर्षि वाल्मीकि जयंती मनाने का वास्तविक उद्देश्य उनकी शिक्षाओं को अपने जीवन में अपनाना है। उन्होंने बच्चों को अच्छे संस्कार देने और राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखने का आह्वान किया।
Maharishi Valmiki Jayanti: रामायण समानता और मानवीय मूल्यों की प्रेरणा देती है
भाजपा जिला अध्यक्ष यतिंद्र सिंह एडवोकेट ने कहा कि महर्षि वाल्मीकि की रामायण सामाजिक समरसता, समानता और मानवीय मूल्यों का संदेश देती है। उन्होंने कहा कि रामायण में व्यक्ति की महानता को उसके जन्म के बजाय कर्मों और आचरण से जोड़कर देखने की प्रेरणा मिलती है।
उन्होंने रामायण को आदर्श जीवन जीने की सीख देने वाला ग्रंथ बताते हुए कहा कि इसमें माता-पिता के प्रति सम्मान, भाई-भाई का प्रेम, पति-पत्नी का समर्पण, मित्रता और कर्तव्य पालन जैसे महत्वपूर्ण जीवन मूल्यों का वर्णन है।
यतिंद्र सिंह ने कहा कि वर्तमान समय में परिवार और समाज में नैतिक मूल्यों को मजबूत करना आवश्यक है। बच्चों को बचपन से अच्छे संस्कार दिए जाने चाहिए, ताकि वे परिवार, समाज और देश के प्रति जिम्मेदार नागरिक बन सकें।
कार्यक्रम के अंत में वक्ताओं ने महर्षि वाल्मीकि की शिक्षाओं को जीवन में अपनाने तथा समाज में आपसी भाईचारे, एकता और सद्भाव को बढ़ावा देने का संदेश दिया।
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