लखनऊ/कानपुर। उत्तर प्रदेश के दो प्रमुख शहरों लखनऊ और कानपुर को जोड़ने वाला कानपुर-लखनऊ एक्सप्रेसवे राज्य के विकास की दिशा में एक बड़ा कदम साबित होने जा रहा है। इस एक्सप्रेसवे के शुरू होने से जहां आम लोगों को जाम और खराब सड़कों से राहत मिलेगी, वहीं व्यापार, उद्योग और शिक्षा के क्षेत्र में भी नए अवसर खुलेंगे। कानपुर का इंडस्ट्रियल क्षेत्र और लखनऊ का एजुकेशन हब एक-दूसरे के और करीब आ जाएंगे, जिससे आईआईटी कानपुर और लखनऊ के शिक्षण संस्थानों के बीच सहयोग भी आसान होगा।
63 किलोमीटर लंबा यह छह लेन का एक्सप्रेसवे लखनऊ के शहीद पथ से शुरू होकर बंथरा, बनी, दतौली कांठा, तौरा, अमरसास और रावल होते हुए कानपुर के आजाद चौक तक पहुंचेगा। भविष्य में इसे आठ लेन तक विस्तारित किया जा सकता है। इस परियोजना पर करीब 4700 करोड़ रुपये की लागत आ रही है। अभी पुराने हाईवे से दोनों शहरों के बीच सफर करने में 2 से 3 घंटे लग जाते हैं, लेकिन एक्सप्रेसवे के चालू होने के बाद यह दूरी महज 40 से 50 मिनट में तय की जा सकेगी।
निर्माण की स्थिति और शुरुआत की संभावित तारीख
एक्सप्रेसवे का निर्माण कार्य वर्ष 2022 में शुरू हुआ था। पहले इसे जुलाई 2025 तक पूरा करने की योजना थी, लेकिन काम की रफ्तार तेज होने के बाद नवंबर 2025 तक अधिकांश कार्य पूरा कर लिया गया। ताजा जानकारी के अनुसार, दिसंबर 2025 के अंत या जनवरी 2026 में ट्रायल रन होने की संभावना है। एनएचएआई अधिकारियों के मुताबिक, शेष बचे छोटे-मोटे कार्य दो से तीन महीने में पूरे कर लिए जाएंगे, जिसके बाद मार्च 2026 तक एक्सप्रेसवे को आम जनता के लिए खोल दिया जा सकता है। उद्घाटन किसी बड़े केंद्रीय नेता द्वारा किए जाने की संभावना है, हालांकि आधिकारिक घोषणा का इंतजार है।
सफर में मिलेंगी ये सुविधाएं
इस एक्सप्रेसवे पर वाहन 120 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चल सकेंगे। यह पूरी तरह एक्सेस कंट्रोल्ड होगा, जिससे केवल निर्धारित स्थानों से ही एंट्री और एग्जिट मिलेगी और जाम की समस्या नहीं होगी। कुल पांच टोल प्लाजा प्रस्तावित हैं, जिन पर टोल शुल्क उद्घाटन के अगले दिन से लागू किया जा सकता है। यह एक्सप्रेसवे गंगा एक्सप्रेसवे और लखनऊ रिंग रोड से भी जुड़ेगा, जिससे पूरे प्रदेश की कनेक्टिविटी और मजबूत होगी। जानवरों के प्रवेश को रोकने के लिए विशेष सुरक्षा इंतजाम भी किए गए हैं।
आर्थिक और सामाजिक लाभ
कानपुर-लखनऊ एक्सप्रेसवे से व्यापार को नई गति मिलेगी। कानपुर का औद्योगिक आधार और लखनऊ का शैक्षणिक व प्रशासनिक केंद्र एक-दूसरे से सीधे जुड़ेंगे। इससे स्टार्टअप, आईटी पार्क, लॉजिस्टिक्स और अन्य उद्योगों को बढ़ावा मिलेगा। रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे और एक्सप्रेसवे के आसपास के गांवों व कस्बों में जमीन की कीमतों में तेजी आएगी, जिससे क्षेत्रीय विकास को बल मिलेगा।
क्या काम बाकी है?
फिलहाल एक्सप्रेसवे पर पेंटिंग, लाइटिंग, साइन बोर्ड और अन्य फिनिशिंग वर्क किया जा रहा है। ट्रायल रन के सफल होने के बाद ही इसे आम लोगों के लिए खोला जाएगा। यदि सब कुछ योजना के अनुसार रहा, तो 2026 की शुरुआत में कानपुर-लखनऊ एक्सप्रेसवे प्रदेशवासियों के लिए एक नई सौगात बनकर तैयार होगा।
