जम्मू-कश्मीर किश्तवाड़ में बादल फटने से 60 की मौत, 69 लापता, 100 से अधिक घायल; पीएम मोदी ने दी हर संभव मदद का आश्वासन
नई दिल्ली/किश्तवाड़, 15 अगस्त। जम्मू-कश्मीर के किश्तवाड़ जिले के दूरस्थ पर्वतीय गांव चीसोटी में गुरुवार को बादल फटने से आई विनाशकारी बाढ़ में कम से कम 60 लोगों की मौत हो गई, 69 लोग अब भी लापता हैं और 100 से अधिक घायल हैं। हादसे के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा और मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला से फोन पर बात कर स्थिति की जानकारी ली और हर संभव मदद का आश्वासन दिया।
चीसोटी, जो मचैल माता यात्रा का बेस कैंप है, हादसे के समय श्रद्धालुओं से खचाखच भरा हुआ था। दोपहर 12 से 1 बजे के बीच आई इस आपदा ने घर, दुकानें, मंदिर, वाहन और सरकारी इमारतों को मलबे में बदल दिया। 16 आवासीय व सरकारी भवन, तीन मंदिर, चार पानी के कोल्हू, एक 30 मीटर लंबा पुल और दर्जनभर से अधिक वाहन बाढ़ में बह गए।
अधिकारियों के मुताबिक, अब तक 30 शवों की पहचान हो चुकी है। मृतकों में दो सीआईएसएफ कर्मी भी शामिल हैं। 160 से अधिक लोगों को सुरक्षित निकाला गया है, जिनमें से 38 की हालत गंभीर है। जिला प्रशासन ने पड्डर में कंट्रोल रूम-कम-हेल्प डेस्क स्थापित किया है और राहत कार्यों के लिए पांच अधिकारियों को तैनात किया है।
हेल्प डेस्क पर 69 लोगों के लापता होने की रिपोर्ट दर्ज की गई है। Machail और Hamori गांवों में सैकड़ों लोग फंसे हुए हैं, जिनसे बिजली आपूर्ति बाधित होने के कारण संपर्क टूट गया है।
बचाव कार्य में एनडीआरएफ, सेना, राष्ट्रीय राइफल्स, एसडीआरएफ, पुलिस, और कई स्वयंसेवी संगठन लगे हैं। सेना ने 300 जवानों के साथ मेडिकल डिटैचमेंट तैनात किए हैं। हेलीकॉप्टर खराब मौसम के कारण इस्तेमाल नहीं हो सके, इसलिए एनडीआरएफ टीम सड़क मार्ग से पहुंची।
स्वास्थ्य विभाग ने भी आपदा से निपटने के लिए विशेष इंतजाम किए हैं। जीएमसी जम्मू में 50 डिजास्टर बेड, 20 वेंटिलेटर बेड और पांच ऑपरेटिंग थिएटर तैयार रखे गए हैं। 200 से अधिक रक्त इकाइयां उपलब्ध कराई गई हैं। 65 एंबुलेंस तुरंत राहत व मरीजों के स्थानांतरण के लिए लगाई गईं।
मचैल माता यात्रा, जो 25 जुलाई को शुरू हुई थी और 5 सितंबर को समाप्त होनी थी, हादसे के बाद लगातार दूसरे दिन स्थगित रही। स्थानीय लोगों के अनुसार, बाढ़ में कई लोग चेनाब नदी में बह गए और कई शव नदी में तैरते देखे गए।
बारिश और कठिन भू-भाग के बावजूद, मलबा हटाने और फंसे लोगों को बचाने का अभियान लगातार जारी है। बचाव दल बड़े पत्थर, उखड़े पेड़ और बिजली के खंभे हटाकर रास्ता साफ कर रहे हैं, ताकि राहत कार्य तेजी से आगे बढ़ सके।
