हिंदू धर्म में तुलसी को पवित्र और पूजनीय माना गया है, लेकिन जन्माष्टमी पर इसका महत्व और भी अधिक बढ़ जाता है। मान्यता है कि इस दिन श्रीकृष्ण की पूजा में तुलसी का प्रयोग करने से वे अत्यंत प्रसन्न होते हैं और भक्तों पर अपनी कृपा बरसाते हैं। वहीं, तुलसी का सही ढंग से प्रयोग न करने पर भगवान कृष्ण नाराज़ भी हो सकते हैं।
इन गलतियों से बचें जन्माष्टमी पर
बिना स्नान किए तुलसी को न छुएं – जन्माष्टमी के दिन स्नान करने के बाद ही तुलसी के पौधे को स्पर्श करें, वरना यह भगवान कृष्ण का अपमान माना जाता है।
गलत समय पर तुलसी तोड़ना – शाम या रात में तुलसी के पत्ते तोड़ना वर्जित है। पत्ते तोड़ने का सही समय सुबह का होता है।
तुलसी पर जल चढ़ाना न भूलें – इस दिन तुलसी पर जल अर्पित करना अत्यंत शुभ माना जाता है। इसके बिना पूजा अधूरी मानी जाती है।
गंदगी वाले स्थान पर तुलसी न रखें – तुलसी के पौधे को हमेशा स्वच्छ और पवित्र स्थान पर रखना चाहिए।
तुलसी के पत्तों को फेंके नहीं – पूजा में प्रयुक्त तुलसी के पत्तों को नदी में प्रवाहित करें या पेड़ के नीचे respectfully रखें।
आस्था के अनुसार, जन्माष्टमी पर इन नियमों का पालन करने से पूजा का फल कई गुना बढ़ जाता है और जीवन में सुख-समृद्धि का आगमन होता है।
