आठ माह बाद भी जांच अधूरी, चार्जशीट नहीं; पूर्व आईपीएस अमिताभ ठाकुर ने कोर्ट से मांगी प्रगति रिपोर्ट, चौक पुलिस से 24 जुलाई तक आख्या तलब
- पंकज झा वाराणसी ब्यूरो
वाराणसी। चौक थाने में दर्ज एक आपराधिक मुकदमे की जांच आठ माह बाद भी पूरी न होने तथा छह माह से अधिक समय बीत जाने के बावजूद आरोपपत्र न्यायालय में प्रस्तुत न किए जाने का आरोप लगाते हुए आजाद सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं पूर्व आईपीएस अमिताभ ठाकुर ने अपने अधिवक्ता अनुज यादव के माध्यम से विशेष मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत में प्रगति रिपोर्ट तलब किए जाने की अर्जी दाखिल की है।
अर्जी में कहा गया है कि एफआईआर दर्ज होने के महज दस दिनों के भीतर पुलिस ने उनकी न्यायिक हिरासत की मांग करते हुए अदालत के अधिकार क्षेत्र का उपयोग किया था, जिससे यह स्पष्ट होता है कि उस समय तक जांच एजेंसी के पास ऐसे तथ्य और सामग्री मौजूद थीं, जिनके आधार पर हिरासत की मांग की गई। इसके बावजूद छह माह से अधिक समय बीत जाने के बाद भी जांच को उसके विधिक निष्कर्ष तक नहीं पहुंचाया गया और न ही सक्षम न्यायालय के समक्ष कोई अंतिम पुलिस रिपोर्ट अथवा आरोपपत्र प्रस्तुत किया गया, जो जांच की प्रगति और पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्न खड़े करता है।
अर्जी में यह भी प्रश्न उठाया गया है कि क्या कोई जांच एजेंसी किसी व्यक्ति की न्यायिक हिरासत प्राप्त करने के बाद, बिना किसी विशेष जांच आवश्यकता, कानूनी बाधा अथवा विलंब के उचित कारण को प्रदर्शित किए, इतने लंबे समय तक जांच को लंबित रख सकती है।
अमिताभ ठाकुर का कहना है कि यदि प्रारंभिक जांच के आधार पर न्यायिक रिमांड की मांग की जा सकती थी, तो उसके बाद भी महीनों तक जांच पूरी न होना न्यायिक प्रक्रिया की निष्पक्षता और समयबद्धता पर सवाल खड़ा करता है। उन्होंने अदालत से अनुरोध किया है कि अब तक हुई समस्त विवेचना की प्रगति रिपोर्ट तलब कर यह स्पष्ट कराया जाए कि जांच किस स्थिति में है और आरोपपत्र दाखिल न होने के पीछे क्या कारण हैं।
मामले की सुनवाई करते हुए विशेष मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट ने चौक पुलिस से इस संबंध में आख्या तलब करते हुए अगली सुनवाई की तिथि 24 जुलाई निर्धारित की है।
गौरतलब है कि बड़ी पियरी निवासी हिन्दू युवा वाहिनी के नेता एवं वाराणसी विकास प्राधिकरण (वीडीए) के मानद सदस्य अम्बरीष सिंह भोला की शिकायत पर गत 9 दिसंबर को चौक थाने में अमिताभ ठाकुर, उनकी पत्नी डॉ. नूतन ठाकुर तथा एक अन्य के विरुद्ध मुकदमा दर्ज किया गया था।
शिकायत में आरोप लगाया गया था कि 30 नवंबर को अमिताभ ठाकुर ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर एक वीडियो पोस्ट कर शिकायतकर्ता पर विभिन्न आपराधिक मामलों में संलिप्त होने के निराधार आरोप लगाए तथा बहुचर्चित कफ सिरप प्रकरण में भी बिना किसी साक्ष्य के उनका नाम जोड़ते हुए भ्रामक और गलत जानकारी प्रसारित की, जिससे उनकी सामाजिक प्रतिष्ठा को गंभीर क्षति पहुंची।
इसी मुकदमे में एफआईआर दर्ज होने के दस दिन बाद अमिताभ ठाकुर को देवरिया से गिरफ्तार कर वाराणसी लाया गया था, जहां उन्हें अदालत में पेश कर न्यायिक रिमांड पर भेजा गया। बाद में उन्हें पुनः देवरिया जेल भेजा गया और आगे चलकर न्यायालय से जमानत प्राप्त हुई। अब इसी प्रकरण में जांच लंबित रहने और आरोपपत्र दाखिल न किए जाने के मुद्दे को लेकर उन्होंने अदालत का दरवाजा खटखटाया है, जिस पर न्यायालय ने पुलिस से विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है।
